अकेले भी लड़ सकते है चुनाव: कांग्रेस

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Image caption कांग्रेस और टीएमसी में सीटों के बटवारे पर विवाद बना हुआ है.

पश्चिम बंगाल में सीटों के बंटवारे को लेकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी की नेता ममता बेनर्जी के एकतरफ़ा फ़ैसले से नाराज़ कांग्रेस ने कहा है कि अगर बात नहीं बनी तो वह पंसदीदा सीटों पर स्वतंत्र तौर पर भी चुनाव लड़ सकते है.

शुक्रवार को ही टीएमसी प्रमुख ममता बेनर्जी ने एकतरफ़ा फ़ैसला लेते हुए 228 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा की थी.

इस फ़ैसले से नाख़ुश कांग्रेस को अभी समझौते की उम्मीद है और उनका कहना है कि बातचीत अभी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है.

कांग्रेस कार्यकारिणी समिति के सदस्य और पश्चिम बंगाल के प्रभारी शकील अहमद का कहना था कि, ''टीएमसी ने एकतरफ़ा फ़ैसले के बाद हमारे लिए 64 सीटें छोड़ी है. हमें ज़्यादा सीटें चाहिए थीं. इसमें से कुछ सीटें हमारी पंसद की नहीं हैं और कुछ सीटों पर हमारी मज़बूत पकड़ भी नहीं है.''

उन्होंने कहा, ''ये एक नई सूरतेहाल है. होली के बाद शीर्ष नेतृत्व फ़ैसला लेगा कि हम 64 सीटों का फ़ैसला मान लें या उससे ज़्यादा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ें या फिर सभी सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़े.''

पश्चिम बंगाल में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और टीएमसी में बातचीत तो हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया.

कांग्रेस चाहती थी टीएमसी उन्हें 98 सीटें दे. टीएमसी काफ़ी बात-चीत के बाद 45 से बढ़कर 60 सीटें देने पर राज़ी हुई थी, लेकिन कांग्रेस को इतनी कम सीटें मनज़ूर नहीं थीं.

शकील अहमद ने कहा, ''पश्चिम बंगाल में जनता चाहती है कि टीएसी और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़े, हम भी समझौता चाहते हैं पश्चिम बंगाल में 34 सालों से वामदलों का जो शासन चला आ रहा है वो अच्छा नहीं है और वो ख़त्म होना चाहिए."

लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा, ''लेकिन हम समझौता मान-सम्मान के साथ चाहते है.ह म समझौते का अभी भी प्रयास कर रहे है.''

वर्ष 2009 में कांग्रेस और टीएमसी ने मिलकर चुनाव लड़ा था. पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें हैं. यहां छह चरणों में मतदान होना है.

तमिलनाडु

उधर तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक की प्रमुख जे जयललिता और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है.

जहां सीआईएम के हाथ 10 सीटें आई हैं वहीं सीपीआई के पाले में 12 सीटें आई हैं.

लेकिन डीएमडीके और एमडीएमके को लेकर मामला अधर में लटका हुआ है.

चैन्नई में मौजूद राजस्थान पत्रिका के स्थानीय पत्रकार दीलिप चारी का कहना है कि सीपीएम और सीपीआई तो सीटों के बंटवारे को लेकर संतुष्ठ हैं और उनका प्रभावक्षेत्र भी उन सीटों तक ही सीमित है. लेकिन वाइको की पार्टी एमडीएमके के साथ स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है.

उन्होंने कहा, ''एमडीएमके 22-23 सीट मांग रहा था लेकिन अन्नाद्रमुक केवल उन्हें 15-16 सीट ही दे रही है. जयललिता एमडीएमके की ज़्यादा सीट मांगने से नाराज़ है वहीं डीएमडीके के साथ अन्नाद्रमुक का 41 सीटों के साथ समझौता तो हो गया है लेकिन जिन पंसद की सीटें वह चाहती थी उसे अन्नाद्रमुक ने अपने पास रख ली है.''

उन्होंने आगे बताया, ''ये पार्टिया अन्नाद्रमुक के 160 सीटों की एकतरफा घोषणा के फैसले से नाराज़ है.''

शनिवार को डीएमडीके अपना घोषणापत्र जारी करेगा, और यहां एक चरण में अप्रैल 13 को मत डाले जाएगें.

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