‘प्रधानमंत्री ने जनता को गुमराह करने की कोशिश की'

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Image caption असांज का कहना है कि ’ये दस्तावेज़ अमरीकी राजनयिकों और वाशिंगटन के बीच हुए आधिकारिक संवाद हैं

खुफ़िया कूटनीतिक दस्तावेज़ जारी करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज ने एक भारतीय टेलिविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि विकीलीक्स के दस्तावेज़ों की सत्यता पर सवाल उठाकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जनता को गुमराह करने की कोशिश की है.

असांज ने कहा है कि संसद में 2008 के विश्वास प्रस्ताव के दौरान पैसे के कथित लेन-देन का मामला अगर गलत है तो भारत स्थित अमरीकी राजदूत को कई सवालों के जवाब देने होंगे.

समाचार चैनल एनडीटीवी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, '' इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि यह दस्तावेज़ पूरी तरह सही और सच्चे हैं.''

विकीलीक्स के दस्तावेज़ों के मुताबिक 2008 में एक अमरीकी कूटनीतिज्ञ ने अपनी सरकार को भेजे संदेश कहा था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतीश शर्मा के एक सहायक ने रुपयों भरी दो तिजोरियाँ दिखाईं थीं और कहा था कि (विश्वास मत के दौरान) समर्थन जुटाने के लिए 50 से 60 करोड़ रुपए हैं.

भारत-अमरीका के बीच परमाणु करार के मुद्दे को लेकर वामपंथी दलों ने सरकार का साथ छोड़ दिया था जिसके बाद विश्वास मत कराया गया था.

एनडीटीवी को दिए गए इस साक्षात्कार में जूलियन असांज ने इस मुद्दे पर संसद में दी गई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सफाई पर सवाल उठाए.

सफाई पर सवाल

असांज ने कहा, ''लगता है कि यह जनता को गुमराह करने की सोची-समझी कोशिश है. प्रधानमंत्री ने यह कहने की कोशिश की है कि दुनियाभर में सरकारों को इन दस्तावेजों पर विश्वास नहीं और इसकी जानकारियां सत्यापित नहीं. ''

असांज ने कहा कि यह दस्तावेज़ पूरी तरह सही हैं, हालांकि इनमें दी गई जानकारी सही या गलत हो सकती है. उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए और इस बारे में गहन पूछताछ की जानी चाहिए.

इन दस्तावेज़ों की तथ्यात्मकता पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा गया है कि ये जानकारियां अमरीकी अधिकारियों की राय मात्र हैं और इनका कोई तथ्यामकता आधार नहीं.

इस सवाल के जवाब में असांज ने कहा, ‘’ये दस्तावेज़ अमरीकी राजनयिकों और वाशिंगटन के बीच हुए आधिकारिक संवाद हैं. इसके ज़रिए अलग अलग देशों में तैनात राजनयिक वाशिंगटन को यह संदेश देना चाहते हैं कि स्थानीय स्तर पर उनके पास गहरी जानकारी है जिसे वो अमरीका तक पहुंचा रहे हैं. ‘’

उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज़ भले ही पूरी तरह राजनयिकों के हाथों नहीं लिखे जाते लेकिन इनमें कही गई सभी बातों की जानकारियां वरिष्ठ कूटनीतिक अधिकारियों को होती है.

उन्होंने कहा कि ये जानकारियां वरिष्ठ कूटनीतिक अधिकारियों और राजदूतों के ज़रिए ही वाशिंगटन तक पहुंचती हैं.

असांज ने कहा है कि अगर ये जानकारियां झूठी हैं तो सवाल यह है कि अमरीकी राजनयिक और अधिकारियों की ओर से भारत की छवि को खराब करने वाली ऐसी जानकारियां अमरीका तक पहुंचाने का क्या मकसद है.

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