भारत में तेज़ी से सुधार हुआ हैः बिल गेट्स

  • 23 मार्च 2011
बिल गेट्स

माइक्रोसॉफ़्ट के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक बिल गेट्स इस समय अपनी पत्नी मेलिंडा के साथ बिहार के दौरे पर हैं. उनकी इस यात्रा का मक़सद पोलियो उन्मूलन और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर बात करना है.

मैंने बिल और मेलिंडा से इस बारे में कुछ सवाल पूछेः

बिहार पर ही इतना फ़ोकस क्यों?

हम भारत भर में वैक्सीन सुलभ बनाने के लिए काम कर रहे हैं. बिहार सरका ने टीकाकरण की दर बढ़ाने का एक लक्ष्य निर्धारित किया है. बिहार में बुनियादी स्तर बहुत नीचे है लेकिन सुधार बहुत तेज़ी से हो रहा है. फिर उत्तर प्रदेश और बिहार इस का जम कर मुक़ाबला कर रहे हैं.

आप पोलियो उन्मूलन पर पूरा ध्यान केंद्रित किए हुए हैं. दुनिया भर में पोलियो के केवल एक प्रतिशत मामले ही रह गए हैं और उन्हें भी पूरी तरह ख़त्म करना आपकी नज़र में कितना मुश्किल या कितना आसान है?

यह एक मुश्किल काम है लेकिन भारत इस क्षेत्र में बहुत अच्छा काम कर रहा है. अगले कुछ साल में हम इसके पूरी तरह उन्मूलन की आशा कर सकते हैं. इस पर पूरा ध्यान इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र में कामयाबी एक बड़ी उपलब्धि होगी.

आपने इस दशक को वैक्सीनेशन के दशक का नाम दिया है. आपने कुछ वर्ष पहले बीबीसी से कहा था कि आप मलेरिया को ख़त्म करने के लिए एक वैक्सीन को विकसित करने के बहुत क़रीब पहुँच गए हैं. अब तक उसमें कितनी प्रगति हुई है?

जिस वैक्सीन पर हमने काम किया वह मलेरिया से 60 प्रतिशत तक निबटने में सक्षम है. जब तक हम ऐसी वैक्सीन विकसित न करलें जिसमें सौ फ़ीसदी सफलता संभव हो तब तक हम इस क्षेत्र में काम करते रहेंगे.

पहले जब कभी कोई नई वैक्सीन बनाई जाती थी तो उसे भारत जैसी जगहों पर पहुँचने में कई साल लग जाते थे. लेकिन अब यह सब कुछ बदल रहा है. यह अवधि घट कर दो साल ही रह गई है. यह सब कुछ काफ़ी आशाजनक है.

अपने वार्षिक नोट में आप ने स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर बनाने के लिए कई संस्थानों की भागीदारी में उदासीनता बरतने की बात कही है. आप किसी की बात कर रहे थे?

समृद्ध सरकारों का बजट सीमित है और वे स्वास्थ्य को अनदेखा कर देते हैं. इटली जैसे कुछ देशों ने अपने स्वास्थ्य अनुदानों में कटौती की है जबकि ब्रिटेन उसे बढ़ा रहा है. हम आशा करते हैं कि देश ब्रिटेन का अनुसरण करें, इटली का नहीं.

भारत में 55 अरबपति हैं. ऐसा क्यों है कि बिल और मेलिंडा को यहाँ आ कर स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर बनाने के लिए काम करना पड़ता है?

हम अकेले नहीं हैं. भारत में दानशीलता बड़े पैमाने पर है. हमारा लक्ष्य केवल इतना है कि हम इस बारे में अन्य लोगों से बात करें. जब हम इस पर बात करते हैं तो इस पर काम करने की प्रवृत्ति भी पैदा होती है.

हम किसी को अपराधबोध महसूस नहीं कराना चाहते. हम यहाँ सिर्फ़ यह बताने आए हैं कि हम ऐसा क्यों कर रहे हैं. और हमें लगता है कि साथ मिल कर काम करने की संभावनाएँ हैं.

भारत में कुछ परोपकारी लोग शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं. यह एक सुखद संकेत है. हमने दुनिया भर में कई जगह काम किया है लेकिन अब हम भारत में हैं क्योंकि हमें लगता है यहाँ काफ़ी तेज़ी से सुधार हुआ है.

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