अब पानी पर तैरने वाला सौर ऊर्जा प्लांट

Image caption पानी पर तैरने वाले इस सौर ऊर्जा प्लांट से ऊर्जा जमा की जा सकेगी.

अब भारत में पहली बार पानी पर तैरने वाला सौर ऊर्जा प्लांट बनाया जाएगा.

भारतीय कंपनी टाटा पावर और प्लांट की तकनीक विकसित करने वाली ऑस्ट्रेलियाई कंपनी सनएन्जी के बीच ये प्लांट बनाने का करार हुआ है.

ये प्लांट लीक्विड सोलर ऐर्रे या एलएसए तकनीक का इस्तेमाल करेगा.

ये प्लांट अभी प्रायोगिक के तौर पर लगाया जा रहा है.

इसका काम अगस्त 2011 में शुरु होगा और टाटा पावर का दावा है कि ये साल के अंत तक काम करने लगेगा.

कैसे काम करेगा प्लांट?

एलएसए के तहत एक लेंस और कई सोलर सेल का इस्तेमाल किया जाता है.

लेन्स को बीच में और सोलर सेल को उसके चारों ओर, लगभग एक सूरजमुखी फूल की तरह लगाया जाएगा और फिर इसे पानी पर तैराया जाएगा.

इससे फ़ायदा ये होगा कि खराब मौसम में भी ये ढांचा सही सलामत रहेगा.

तेज़ हवाओं से बचने के लिए बड़ी-बड़ी दीवारें या इमारतें नहीं खड़ी करनी पड़ेंगी और ज़रूरत पड़ने पर ये कुछ देर के लिए ख़ुद ही पानी में डूबने की क्षमता रखेगा.

इससे नुकसान नहीं होगा बल्कि सेल को ठंडा होने का मौक़ा मिलेगा.

ज़्यादा ऊर्जा की आपूर्ति

सनएन्जी के कार्यकारी निदेशक फ़िल कॉनर के मुताबिक किसी आम बांध के मुकाबले पानी पर तैरने वाले इस सौर प्लांट से ऊर्जा की आपूर्ति छह से आठ घंटे ज़्यादा हो सकेगी.

उनका दावा है कि भारत अगर इस नई तकनीक से देश में 300 वर्ग किलोमीटर दायरे का पानी भी इस्तेमाल कर सके तो कोयले से चलाए जाने वाले 12 बिजली घरों से ज़्यादा ऊर्जा पैदा कर पाएगा.

गौरतलब है कि दुनिया की कुल ऊर्जा में से एक फीसदी से कम की आपूर्ति सौर ऊर्जा के ज़रिए होती है.

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