श्रीकृष्ण की गुप्त रिपोर्ट पर तेलंगाना में बवाल

  • 25 मार्च 2011
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आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में श्रीकृष्ण समिति की उस कथित गुप्त रिपोर्ट के विरुद्ध प्रदर्शन भड़क उठे हैं जिसमें समिति ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो अलग तेलंगाना राज्य स्थापित न करे क्योंकि उससे सांप्रदायिक हिंसा और माओवादी समस्या का सामना करना पड़ेगा.

इस गुप्त रिपोर्ट के कुछ हिस्से लीक होकर बाहर आ गए हैं, इसने तेलंगाना के तमाम राजनेताओं को भी क्रोधित कर दिया है.

सत्तारूढ़ कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी और तेलुगू देशम सहित सभी राजनीतिक दलों के तेलंगाना क्षेत्र के नेता समिति पर खूब बरसे और उस पर आंध्र क्षेत्र के पूँजीपतियों के हाथों बिक जाने का आरोप लगाया. तेलंगाना के कई जिलों और खुद हैदराबाद में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें श्रीकृष्ण और समिति के दूसरे सदस्यों के पुतले जलाए गए. कांग्रेस के नेताओं में एक मंत्री शंकर राव, सांसद एम जगन्नाथम और पूनम प्रभाकर और कई विधायक भी शामिल हैं.

श्रीकृष्ण समिति को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि समिति ने आंध्र के पूंजीपतियों से कितने पैसे लेकर तेलंगाना विरोधी रिपोर्ट दी है.

भारी विरोध

जगन्नाथम ने कहा, "ये तेलंगाना की जनता के ख़िलाफ़ रिपोर्ट है. वो कैसे कह सकते हैं कि तेलंगाना राज्य बनने से कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होगी." एक कांग्रेसी विधायक यादव रेड्डी ने कहा, "श्रीकृष्ण समिति ने सिफ़ारिश की है कि तेलंगाना के नेताओं को पद देकर ठंडा किया जाए और समाचार माध्यमों का उपयोग करके तेलंगाना आन्दोलन को ख़त्म किया जाए." तेलंगाना राष्ट्र समिति के वरिष्ठ विधायक टी हरीश राव ने कहा कि समिति ने तेलंगाना समस्या का समाधान बताने की बजाए ये सुझाव दिया है कि आन्दोलन को कुचलने के लिए क्या षड्यंत्र रचा जाए और क्या चाल चली जाए.

भाजपा और तेलुगू देशम के नेताओं ने भी इसी तरह की कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने कहा कि समिति की ये गुप्त रिपोर्ट इस काबिल भी नहीं है कि उसे भाजपा के कार्यालय के कचरे की टोकरी में फेंका जाए. आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य की मांग पर विचार के लिए केंद्र सरकार ने गत वर्ष ही जस्टिस श्रीकृष्ण की अगुवाई में यह समिति बिठा दी थी और उसने गत दिसंबर में ही अपनी रिपोर्ट केंद्र गृह मंत्रालय को पेश कर दी थी.

उसके बाद केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट का वो भाग तो सार्वजनिक कर दिया था जिसमें समिति ने सरकार के सामने छह अलग अलग उपाय रखे थे और उनके संभावित प्रभाव के बारे में अपनी राय भी दे दी थी.

लेकिन गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट के एक भाग को ये कह कर गुप्त रखा था कि इसमें कानून व्यवस्था के विषय के बारे में संवेदनशील जानकारी है. जो रिपोर्ट सार्वजनिक की गई थी उसमें समिति ने कहा था कि सबसे अच्छा रास्ता ये ही होगा कि आंध्र प्रदेश को एक रखा जाए और दूसरा सबसे अच्छा रास्ता ये होगा कि तेलंगाना को अलग राज्य बनाया जाए. लेकिन अब जो गुप्त रिपोर्ट सामने आई है उसमें समिति ने तेलंगाना राज्य के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाया है. ताकत के इस्तेमाल की सलाह

केंद्र सरकार ने उस समिति को जो जिम्मेदारी दी थी उससे कहीं आगे जाकर उसने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को ये सुझाव भी दिए की वो उस्मानिया, काकतिया और दूसरे विश्वविद्यालयों में तेलंगाना आन्दोलन को रोकने के लिए प्रभावशाली शक्ति का उपयोग करें. तेलंगाना के एक पूर्व सांसद नारायण रेड्डी ने इस गुप्त रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी और उसी पर जस्टिस नरसिम्हा रेड्डी ने आदेश जारी करते हुए केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वो ये रिपोर्ट सार्वजनिक करे क्योंकि उसमें गुप्त रखने लायक कोई बात नहीं है. न्यायमूर्ति ने इस गुप्त रिपोर्ट को असंवैधानिक बताते हुए उसके कुछ हिस्सों को अपने फैसले में ही प्रकाशित कर दिया है. इस गुप्त रिपोर्ट के कुछ संक्षिप्त भाग केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को दिए थे. इन्हीं के सार्वजनिक हो जाने से श्रीकृष्ण समिति और केंद्र सरकार दोनों को काफ़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है.

श्रीकृष्ण समिति की जो रिपोर्ट गृह मंत्रालय ने पहले प्रकशित की और जो रिपोर्ट अब सामने आ रही है उनके अंतर्विरोधों ने समिति की विश्वनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है.

लोग पूछने लगे हैं कि क्या इस समिति पर 20 करोड़ रुपए की सरकारी राशि खर्च करना सही था.

लेकिन केंद्र सरकार अब भी इस गुप्त रिपोर्ट का पूरा ब्यौरा बाहर आने से रोकने की कोशिश कर रही है. उसने हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध अपील के लिए सोमवार तक का समय माँगा है. गुप्त रिपोर्ट की कुछ भाग सामने आ जाने से एक बार फिर तेलंगाना में भावनाएं भड़क उठी हैं और इससे आंदोलन के और भी तेज़ हो जाने की आशंका बढ़ गई है.

दूसरी और इस रिपोर्ट ने तेलंगाना के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीयत पर भी संदेह खड़ा कर दिया है.

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