अदालत का आदेश गुप्त रिपोर्ट सार्वजनिक हो

आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा है की वो श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट के उस भाग को भी सार्वजनिक करे जिसे अब तक गुप्त रखा गया है.

आंध्रप्रदेश के बंटवारे और तेलंगाना राज्य की स्थापना की मांग पर विचार के लिए केंद्र सरकार ने जो श्रीकृष्ण समिति बनाई थी उसने गत 31 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट गृहमंत्री चिदंबरम को पेश कर दी थी.

गृह मंत्रालय ने जहाँ शेष रिपोर्ट राजनैतिक दलों के हवाले कर दी वहीं उसने रिपोर्ट के एक अहम भाग को गुप्त रखा.

ऐसा करने के लिए दलील दी गई थी कि इसका संबंध कानून और व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दे से है.

लेकिन तेलंगाना के एक पूर्व सांसद नारायण रेड्डी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी और मांग की कि श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट के ‘अध्याय-आठ’ को भी सार्वजनिक किया जाए.

इस याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी ने कहा की इस रिपोर्ट को गुप्त रखने का कोई औचत्य नहीं है.

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण समिति ने केवल आम राय जानने का काम किया है और अनेक वर्गों और गुटों से बातचीत के बात अपनी रिपोर्ट तैयार की थी.

रेड्डी ने कहा कि रिपोर्ट के किसी भी भाग को राज़ के तौर पर रखना असंवैधानिक है और इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से ही इस पर सार्थक बहस हो सकती है और सही फैसला लिया जा सकता है.

उन्होंने कहा की खुद श्रीकृष्ण समिति ने भी अपनी रिपोर्ट को गुप्ता रखने की कोई सिफ़ारिश नहीं की थी.

केंद्र सरकार ने इस फ़ैसले के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील करने के लिए सोमवार तक का समय माँगा है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि सरकार अध्याय-आठ को सार्वजनकि करने का कोई इरादा रखती है.

श्रीकृष्ण समिति की जो रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है उसमें समिति ने केंद्र के सामने छह अलग-अलग उपाय रखे थे.

इनमें आंध्रप्रदेश को एक राज्य रखना तथा उस के दो या तीन भाग करना जैसे उपाय शामिल थे.

इस में यह भी बताया गया था कि जहाँ चार विकल्पों पर अमल करना संभव नहीं है वहीं दो विकल्पों को चुना जा सकता है.

इन दो विकल्पों में से पहला है तेलंगाना को एक अलग राज्य बनाया जाना और दूसरा है आंध्रप्रदेश को एक संगठित राज्य रखना.

हालाँकि आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया गया है कि इस गुप्त रिपोर्ट में क्या कहा गया है, लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है की इसमें तेलंगाना राज्य की स्थापना का विरोध किया गया है.

सूत्रों के मुताबिक इसमें समिति ने कहा है कि अगर तेलंगाना अलग राज्य बनता है तो वहां हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा बढ़ जाएगी.

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Image caption पृथक राज्य तेलंगना की मांग को लेकर आंदोलन हिंसक होते जा रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी, मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन जैसी पार्टियों का ज़ोर बढ़ेगा और माओवादी भी शक्तिशाली हो जाएँगे.

सूत्रों का कहना है की समिति ने सरकार को सुझाव दिया है की वो समाचार माध्यमों का उपयोग कर तेलंगाना आंदोलन को कमज़ोर कर सकती है क्योंकि राज्य के 13 टीवी न्यूज़ चैनलों में से केवल दो ही तेलंगाना का समर्थन करते हैं.

समिति ने यह भी कहा है की अधिकतर समाचार पत्र आंध्र और रायला क्षेत्र के लोगों के हाथों में है और उनके संपादक भी इन्ही क्षेत्रों के हैं. उनका उपयोग करते हुए इस आंदोलन को कमज़ोर किया जा सकता है.

साथ ही समिति ने इस बात की भी सिफ़ारिश की है की ओस्मानिया विश्वविद्यालय जैसे स्थानों पर केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाए.

तेलंगानावादी संगठनों ने इन सिफ़ारिशों के विरुद्ध आवाज़ उठाई है और कहा है की इससे यह सिद्ध होता है की श्रीकृष्ण समिति बनाने का उद्देश्य इस समस्या को हल करना नहीं बल्कि उसे और उलझाना था.

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