तेलंगाना के कांग्रेसी सांसदों की धमकी

  • 26 मार्च 2011

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं.

तेलंगाना क्षेत्र से संबंध रखने वाले उसके लोक सभा और राज्यसभा सदस्यों ने शुक्रवार को धमकी दी है कि अगर केंद्र सरकार ने एक जून से पहले तेलंगाना राज्य की स्थापना की स्पष्ट घोषणा नहीं कि तो वो संसद और पार्टी के तमाम पदों से त्यागपत्र दे देंगे. ये धमकी उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के महासचिव गुलाम नबी आजाद से भेंट के दौरान दी.

इन सांसदों ने जिनमें 11 लोक सभा सदस्य थे, आजाद को एक पत्र दिया जिसमें कहा गया है कि हालात ऐसे हैं कि उनके पास त्यागपत्र दे देने के सिवा कोई रास्ता नहीं है और वो आम नागरिकों के साथ खड़े रहना ज्यादा पसंद करेंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को उसी घोषणा पर जमे रहना चाहिए जो 9 दिसंबर, 2009 को गृह मंत्री चिदंबरम ने की थी और जिसमें उन्होंने कहा था कि तेलंगाना राज्य की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इन सांसदों ने श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट के उस गुप्त भाग पर सख्त नाराज़गी व्यक्त की जिसमें समिति ने तेलंगाना के आंदोलन को मंज़र करने के लिए सुझाव दिए थे और कहा था कि तेलंगाना के कांग्रेसी नेताओं को मुख्य पद देकर यह काम किया जा सकता है. भारी नाराज़गी

आजाद ने आंध्र प्रदेश के प्रभारी बनने के बाद शुक्रवार को पहली बार तेलंगाना और आंध्र क्षेत्रों के कांग्रेसी सांसदों से अलग अलग भेंट की और राज्य की स्थिति को समझने की कोशिश की.

ये स्पष्ट था कि पार्टी आंध्र प्रदेश में पूरी तरह क्षेत्रीय आधार पर बंट गई है और दो क्षेत्रों के सांसद काफ़ी दूर हो गए हैं और इसका स्वयं पार्टी के नेतृत्व को भी अच्छी तरह अंदाज़ा है. चुनांचे जहाँ तेलंगाना के सांसदों ने इस्तीफ़े की धमकी दी है वहीं आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के सांसदों ने आंध्र प्रदेश के बंटवारे का विरोध करते हुए कहा कि वो उसे स्वीकार नहीं करेंगे. आंध्र के सांसदों ने कहा है कि तेलंगाना राज्य नहीं बनाना चाहिए.

उनमें से एक एल राजगोपाल ने कहा कि केंद्र सरकार को श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट पर अमल करना चाहिए जिसके गुप्त भाग में समिति ने तेलंगाना का विरोध किया था. यह स्पष्ट है कि तेलंगाना के सांसदों को अपना रुख़ कदा करना पड़ रहा है क्योंकि उन पर आम जनता का दबाव बढ़ता जा रहा है.

इसी दबाव के चलते शुक्रवार ही तेलुगू देशम के एक विधायक पी श्रीनिवास रेड्डी ने विधानसभा और पार्टी से त्यागपत्र दे दिया.

उन्होंने आरोप लगाया कि तेलुगू देशम पार्टी तेलंगाना की जनता को धोखा दे रही है इसीलिए वो पार्टी छोड़ कर तेलंगाना राष्ट्र समिति में जा रहे हैं.

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