आंध्र विधानसभा में मारपीट

राजाशेखर रेड्डी
Image caption विवाद तब शुरु हुआ जब राजाशेखर रेड्डी के ख़िलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ

आंध्र प्रदेश विधानसभा में सोमवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दल तेलुगु देशम के सदस्यों के बीच जम कर मार-पीट हुई.

ये घटना उस समय हुई जब तेलुगु देशम के कुछ विधायकों ने सदन में ऐसी तख़्ती प्रदर्शित की, जिस पर दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेख़र रेड्डी के बारे में अपशब्द कहे गए.

इस पर राजशेखर रेड्डी के भाई और कृषि मंत्री वाईएस विवेकानंद रेड्डी क्रोधित हो गए. उन्होंने गुस्से में विपक्षी सदस्यों के पास से वो तख़्ती छीन कर उसे फाड़ डाला.

जब विपक्षी सदस्यों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो खींचा-तानी शुरु हो गई और मारपीट की नौबत आ गई.

तेलुगु देशम ने आरोप लगाया कि मंत्री ने उसके दो सदस्यों पर हाथ उठाया.

इस घटना के बीच उप-सभापति ने सदन को स्थागित कर दिया लेकिन मारपीट फिर भी चलती रही.

कांग्रेस के बाग़ी नेता और राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगन मोहन रेड्डी के समर्थक विधायक भी इस झड़प में शामिल हो गए और उन्होंने विवेकानंद रेड्डी का साथ दिया.

गड़बड़ के दौरान ही कुछ मंत्री सदन से बाहर निकल गए और कुछ एक ने इस झड़प को रोकने की कोशिश की.

कड़ी प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने इस घटना पर दुख प्रकट करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और विवेकानंद रेड्डी को तलब कर उनके व्यवहार पर नाराज़गी जताई.

तेलुगु देशम और दूसरे विपक्षी दलों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रया व्यक्त की है. तेलुगु देशम के वरिष्ठ नेता अशोक गजपति राजू ने आरोप लगाया कि वाईएस विवेकानंद रेड्डी ‘सड़क छाप लोगों’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं.

उन्होंने मंत्री को बर्ख़ास्त करने की मांग करते हुए कहा, "अगर मैं मुख्यमंत्री होता तो पांच मिनट में उन्हें बर्खास्त कर देता, उनके इस्ताफ़े का भी इंतज़ार नहीं करता."

तेलुगु देशम का आरोप है की इस हमले का उद्देश्य वाईएस राजशेखर रेड्डी के दौर में हुए भ्रष्टाचार की छानबीन के लिए विपक्ष की मांग को कुचलना है.

दरअसल विपक्ष इस मांग पर अड़ा हुआ है कि पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी के दौर में निजी कंपनियों द्वारा भू-अधिग्रहण में जो कथित अनियमितताएं हुई थीx, उनकी छानबीन के लिए विधानसभा और विधान परिषद की एक संयुक्त विधायक समिति गठित की जाए.

लेकिन आंध्र प्रदेश सरकार इसे स्वीकार नहीं कर रही है.

दूसरी और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन की मांग है की जो वक़्फ़ भूमि निजी कंपनियों को दी गई है, उसे भी इस छानबीन के दायरे में लाया जाए.

इन मांगो के चलते विधानसभा में कोई कामकाज नहीं हो रहा है और तनाव के माहौल के बीच रोज़ाना ही सदन को स्थागित करना पड़ रहा है.

दिलचस्प बात है कि ख़ुद कांग्रेस के भीतर एक गुट चाहता है की सरकार इस तरह की समिति बिठाए ताकि राजशेखर रेड्डी के राज में हुए कथित भ्रष्टाचार को बेनकाब किया जा सके और उनके पुत्र जगनमोहन रेड्डी को निशाना बनाया जा सके.

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