राहत दल पर हमला, कांग्रेस विधायक हिरासत में

  • 29 मार्च 2011
Image caption स्थानीय लोगों के विरोध और नक्सलियों की गतिविधियों की खबर के कारण विधायकों को रोक दिया गया था.

दंतेवाड़ा के चिंतलनार में कथित रूप से सुरक्षा बलों के तांडव की जांच करने गए कांग्रेस के विधायक दल के सदस्यों को भी बैरंग ज़िला मुख्यालय वापस लौटना पड़ा है जहाँ उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबर है.

बस्तर संभाग के पुलिस माहानिरीक्षक टीजे लंग्कुमेर का कहना है कि स्थानीय लोगों के विरोध और नक्सलियों की गतिविधियों की खबर के कारण विधायकों को दोरनापाल के पास ही रोक दिया गया है. उनका कहना है कि मना करने के बावजूद जब विधायक घटनास्थल पर जाने के लिए जिद करने लगे तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया है.

कांग्रेस के 10 विधायकों का एक दल 14 मार्च से दंतेवाड़ा के दौरे पर गया हुआ था. मंगलवार को यह दल दंतेवाड़ा के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिमापुरम के दौरे पर था. बताया जा रहा है कि पोल्लम्पल्ली के पास दल को सलवा जुडूम के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा है.

कांग्रेस के नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री नन्द कुमार पटेल का कहना है कि उन्हें लोगों ने नहीं बल्कि पुलिस नें रोका है. पटेल का आरोप है कि दोरनापाल के पास पुलिस के महानिरीक्षक ने अपनी गाड़ी विधायकों के काफ़िले के सामने लगा दी और उन्हें आगे जाने से रोका.

विधायकों को ज़िला मुख्यालय दंतेवाड़ा लाया गया है.

कांग्रेस के विधायकों का आरोप है कि पुलिस सुरक्षा बलों के तांडव का शिकार हुए लोगों तक राहत पहुंचाने नहीं दे रही है.

पटेल कहते हैं, "हम सवाल पूछते हैं आखिर किसी को उन गावों में क्यों जाने नहीं दिया जा रहा है. आखिर सरकार क्या छुपाना चाहती है?''

'क्या छुपाना चाहती है सरकार'

कहा जा रहा है कि सोमवार को बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक ने दोरनापाल में सलवा जुदिम के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी. बैठक को गुप्त रखा गया था.

बैठक में क्या हुआ किसी को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन ठीक एक दिन बाद कांग्रेस के विधायकों के दल पर हमले से इस बैठक पर सवाल खड़े हो गए हैं.

इससे पहले सोमवार को भी राहत ले जा रहे सरकारी अधिकारियों के दल पर कथित रुप से सलवा जुडूम के लोगों ने हमला किया था और राहत सामग्री को लूट लिया था.

कहा जा रहा है कि सलवा जुडूम के लोगों ने राहत दल पर पथराव किया और पुलिस के एक सहायक अवर निरीक्षक के साथ मार पीट भी की है.

यह दल तहसीलदार विजेंदर पटेल के नेतृत्व में पीड़ित गावों में राहत पहुंचाने जा रहा था.

खबरें यह भी हैं कि लोक अभियंत्रण विभाग के एक दल के सदस्यों का भी कोई अता पता नहीं है.

यह दल पीड़ित गावों में चापाकल लगाने गया हुआ था. सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस दल के लोगों के बारे में मुख्यालय तक कोई जानकारी नहीं पहुँच पायी है.

दूसरी तरफ इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के नेतृत्व में सामजिक संगठनों ने तिल्दा के इलाके में एक बैठक की और बस्तर के हालत का जायज़ा लिया.

इस बैठक में आदिवासी महासभा सहित छत्तीसगढ़ के प्रमुख सामाजिक संगठन शामिल हैं.

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