आतंकवाद से जुड़ी जानकारी हॉटलाइन पर

  • 29 मार्च 2011
Image caption दोनों देशों के गृह मंत्रालयों के बीच हॉटलाइन सेवा प्रारंभ की जाएगी.

भारत के गृह सचिव जी के पिल्लै और पाकिस्तान के गृह सचिव कमर ज़मा चौधरी के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों को एक बेहतर मुकाम पर ले जाते हुए कई अहम फैसलों का ऐलान किया गया है.

राजधानी दिल्ली में हुई, दो दिन की इस गृह सचिव स्तरीय वार्ता के बाद, एक संयुक्त बयान जारी किया गया.

गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा, "वार्ता बेहद सकारात्मक रही, हम आगे बढ़े हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास में कमी आई है."

बयान के मुताबिक दोनों देशों के बीच अब एक हॉटलाइन चलाई जाएगी, जिसका मकसद आतंकवाद से जुड़ी कोई भी नई जानकारी जल्द से जल्द बांटना होगा.

दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप को खत्म करने का अपना वादा दोहराया और कहा कि उसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाना बेहद ज़रूरी है.

हमलों की जांच में सहयोग

बयान के मुताबिक 2008 के मुंबई हमलों की तहकीकात से जुड़ी जानकारी बांटने के लिए दोनों देश एक दूसरे के न्यायिक जांच आयोगों का स्वागत करेंगे. ये आयोग मजिस्ट्रेट स्तर के होंगे.

भारत ने कहा है कि वो अगले एक से डेढ़ महीने में पाकिस्तान के जांच आयोग के भारत आने की तारीखों की घोषणा भी कर देगा.

साथ ही दोनों देशों ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) मुंबई हमलों की जांच में एक दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे.

भारत के गृह सचिव ने कहा, "मुंबई हमलों में संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिकों की आवाज़ के नमूनों के लिए अब पाकिस्तान अपने उच्च न्यायालय में अर्ज़ी डालेगा."

इससे पहले भारत की ये मांग पाकिस्तान की निचली अदालत ने खारिज कर दी थी.

बयान में बताया गया कि समझौता एक्सप्रेस धमाके की तहकीकात से जुड़ी जानकारी पाकिस्तान को दी गई और भारत ने कहा कि अदालत में रिपोर्ट दायर हो जाने के बाद ताज़ा जानकारी भी बांटी जाएगी.

भारत आएंगे पाक गृह मंत्री

यह भी तय किया गया है कि अब दोनों देशों के बीच गृह सचिव स्तरीय वार्ता सालाना की जगह, हर छह महीने के बाद होगी.

अगली वार्ता के लिए भारत के गृह सचिव जीके पिल्लै पाकिस्तान जाएंगे.

वहीं यह भी तय किया गया है कि पाकिस्तान के गृह मंत्री भारत आएंगे, हालांकि इसकी तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है.

साथ ही दोनों देशों के बीच वीज़ा देने की प्रणाली को सहज बनाने के लिए एक संयुक्त कार्यकारी दल बनाने पर भी सहमति बनी है.

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