न्यायमूर्ति शर्मा आदिवासियों को प्रताड़ित करने के मामले की जाँच करेंगे

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दंतेवाड़ा में आदिवासियों के घर जलाने और संपत्ति नष्ट किए जाने के मामले की जांच छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीपी शर्मा करेंगे.

गुरुवार को राज्य सरकार ने इसकी घोषणा की है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा थे कि वह मामले की जांच उच्च न्यायलय के जज से कराए.

सुरक्षा बलों पर आरोप है कि मार्च के महीने में उन्होंने कथित तौर पर दंतेवाड़ा के चिंतलनार में मोरपल्ली, तिमापुरम और ताड़मेटला के इलाक़े में आदिवासियों के घरों में आग लगा दी थी और महिलाओं से बदसलूकी की थी.

इस मामले की कई स्तरों पर जांच कराई जा रही है. एक जांच दंतेवाड़ा के ज़िलाधीश के निर्देश पर एक समिति कर रही है जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. एक जांच दंतेवाड़ा के ही न्यायिक दंडाधिकारी कर रहे हैं जबकि राज्य का अपराध अनुसंधान विभाग भी मामले की जांच कर रहा है. अब इस मामले की जांच उच्च न्यायलय के कार्यरत न्यायाधीश करेंगे.

आलोचनाओं में घिरने के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह नें भी घटनास्थल का दौरा किया और मुआवज़े का ऐलान किया. सरकार नें पीड़ित गावों में राहत पहुंचाने का फ़ैसला भी किया.

'चिंतलनार में उत्पात मचाया'

घटना 14 मार्च की है जब माओवादियों से मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबल के जवान चिंतलनार से वापस लौट रहे थे. सुरक्षा बलों पर आरोप है कि लौटने के क्रम में उन्होंने चिंतलनार के इलाक़े में कुछ गांवों में जमकर उत्पात मचाया. आरोप हैं कि इस क्रम में जवानों ने आदिवासियों के 300 घरों को जलाया, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और कुछ ग्रामीणों की हत्या भी कर दी थी.

हालांकि पुलिस के अधिकारी इस घटना से इनकार करते हुए कह रहे हैं कि ये सिर्फ़ माओवादियों का एक प्रचार है. दंतेवाड़ा के कलक्टर द्वारा मामले की जांच के फ़ैसले से कई पुलिस अधिकारी नाराज़ भी हो गए.

शायद यही कारण रहा कि पहले तो पुलिस ने आयुक्त और कलेक्टर को राहत सामग्री लेकर जाने से रोका और बाद में पुलिस नें अपना ग़ुस्सा पत्रकारों पर भी निकाला. दंतेवाड़ा के कुछ पत्रकारों के ख़िलाफ़ पुलिस ने थाने में मामला भी दर्ज किया है.

ऐसे आरोप लगे कि ‘सलवा जुडूम’ के कार्यकर्ता, कोया कमांडो और विशेष पुलिस अधिकारियों के दल किसी को भी प्रभावित गावों में जाने नहीं दे रहे थे. इसकी वजह से न सिर्फ़ कलेक्टर, कमिश्नर और अनुमंडल अधिकारी को बैरंग वापस लौटना पड़ा बल्कि राहत का सामन ले जा रहे वाहनों को विशेष पुलिस अधिकारियों के एक दल ने रोका और वाहन के मालिकों के साथ मार पीट भी की.

सरकार पर लगे आरोप

सुरक्षा के घेरे में राहत सामग्री ले जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के काफ़िले पर भी कुछ दिनों पहले पथराव हुआ था और उन पर अंडे फेंके गए. बाद में कांग्रेस के विधायक दल को भी इसी तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ा था.

सदन में विपक्ष के नेता रविन्द्र चौबे ने आरोप लगाया कि हमला करने वालों को सरकार पनाह दे रही है क्योंकि सुरक्षा घेरे के बावजूद बस्तर संभाग के आयुक्त, तहसीलदार, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और विधायकों पर हमले हुए हैं.

राज्य के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के नेता नन्द कुमार पटेल नें आरोप लगाया है कि हमला करने वालों में एक शिक्षक और भारतीय जनता पार्टी का एक नेता शामिल हैं, जिन्हें सरकार की तरफ़ से अंगरक्षक मिले हुए हैं. चिंतलनार की घटना को लेकर स्वामी अग्निवेश नें सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसपर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायलय नें छत्तीसगढ़ की सरकार से कहा था कि वह इस प्रकरण की जांच उच्च न्यायलय के कार्यरत न्यायाधीश से करवाए.

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