छत्तीसगढ़: 17 जजों को अनिवार्य सेवानिवृति

Image caption सूत्रों का कहना है कि कुल 30 जजों के खिलाफ विभिन्न मामलों में जांच चल रही है.

छत्तीसगढ़ के विधि विभाग ने प्रदेश में नियुक्त 17 जजों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने का आदेश दिया है.

उच्च न्यायलय के रजिस्ट्रार जनरल अरविंद श्रीवास्तव का कहना है कि 17 में से एक जज को विभागीय जांच के बाद हटाया गया है जबकि बाक़ी के 16 जजों पर उनके काम-काज के आधार पर कार्रवाई हुई है.

विभाग का यह आदेश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की सिफारिशों पर किया गया है.

यह सभी जज राज्य के विभिन्न ज़िलों में मत्वपूर्ण पदों पर हैं.

विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ज़्यादातर जजों पर यह कार्रवाई उनके कामकाज के आधार पर की जा रही है. जिन जजों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गयी है वो सभी जज या तो 50 साल की उम्र से अधिक हैं या फिर 20 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं.

राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि कुल 30 जजों के खिलाफ विभिन्न मामलों में जांच चल रही है. इस दौरान पहले चरण में 17 जजों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गयी है जबकि बाक़ी पर अभी भी जांच चल रही है.

कहा जा रहा है कि इन जजों पर कार्रवाई काफी पहले हो गयी होती मगर राज्य के विधि और कानून विभाग के पास इस मामले की फ़ाइल काफी दिनों तक पड़ी रही. सूत्रों के अनुसार विभाग के मंत्री रामविचार नेताम के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया.

उच्च न्यायालय की सिफारिशें

हालांकि यह सिर्फ एक मामला है जिसमें जजों पर कार्रवाई की गयी हो.

ग़ौरतलब है कि राज्य की उच्च न्यायिक सेवा में वर्ष 2008 में हुई नियुक्तियों पर भी विवाद छिड़ा हुआ है. ऐसे आरोप लग रहे हैं कि इस परीक्षा के दौरान राज्य के विधि विभाग में उच्च पदस्थ अधिकारी और हाईकोर्ट के कुछ अन्य विधि अधिकारियों के रिश्तेदारों का चयन हुआ है.

कहा जा रहा है कि इस मामले की शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग से की गई है जिसके बाद आयोग ने अपने नियमों के मुताबिक यह मामला केंद्रीय विधि मंत्रालय के सीईओ को सौंप दिया है. यह मामला बिलासपुर उच्च न्यायलय में लंबित भी है.

इस मामले को लेकर धमतरी के निवासी आरिफ़ रोकारिया ने सूचना के अधिकार के तहत उच्च न्यायलय के रजिस्ट्रार से ऐसे सभी उम्मीदवारों की उत्तरपुस्तिकाएं प्राप्त कीं जिनके नामों को लेकर विवाद की स्थिति है.

इनमें विधि विभाग के एक बड़े अधिकारी के पुत्र और पुत्री के अलावा निचली अदालत, हाईकोर्ट और न्यायिक सेवा के अन्य अफसरों के बच्चों के नाम शामिल हैं.

इसी तरह ज़िला एवं सत्र न्यायालय में पदस्थ कुछ जज और मध्य प्रदेश की एक महिला पर हाईकोर्ट के उच्च अधिकारी की रिश्तेदार होने के नाते चयनित होने का आरोप लगा है.

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