टाटा-राडिया से हुई पूछताछ

रतन टाटा
Image caption रतन टाटा से भी संसदीय समिति पूछताछ कर सकती है.

2जी स्पेक्ट्र्म घोटाले के मामले में संसद की लोकलेखा समिति ने शीर्ष उद्योगपति रतन टाटा और कॉर्पोरेट दलाल नीरा राडिया से पूछताछ की है.

समिति ने रतन टाटा और नीरा राडिया से इस घोटाले में उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ की है.

इसके बाद समिति ने अनिल अंबानी सहित कई और उद्यमियों को पूछताछ के लिए तलब किया है.

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जाँच पीएसी कर रही है और इसके लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का भी गठन किया जा चुका है.

पुलिस की जांच के अनुसार 2007-08 में 122 कंपनियों को 2जी लाइसेंस जारी किए गए जिसकी प्रक्रिया में व्यापक धांधली हुई और रिश्वत भी दी गई.

इसी मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा सीबीआई की हिरासत में हैं और उनके ख़िलाफ़ शनिवार को आरोपपत्र भी दायर किया गया है.

राजा पर षडयंत्र, धोखाधड़ी और जालसाज़ी के आरोप लगाए गए हैं.

राजा के कार्यकाल के दौरान जो लाइसेंस आवंटित हुए उनमें कई ऐसी फर्में थीं जिनको दूरसंचार मामलों का कोई अनुभव नहीं था. इतना ही नहीं कैग रिपोर्ट के अनुसार इसकी पूरी प्रक्रिया में न तो पारदर्शिता बरती गई और न ही नियमों का पालन किया गया.

कैग रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसी कंपनियों को लाइसेंस मिले जो इसके लिए योग्य नहीं थीं जिसके कारण सरकार को क़रीब 170 हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

पूछताछ

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Image caption बताया गया है कि कई सवालों के जवाब नीरा राडिया ने टाल दिए

लोकलेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने पूछताछ के बाद पत्रकारों को बताया कि पूछताछ के दौरान रतन टाटा तो सवालों के साफ़ जवाब देते रहे लेकिन नीरा राडिया सवालों को टालती रहीं.

पीएसी के एक सदस्य के हवाले से पीटीआई ने कहा है कि नीरा राडिया ने पूछताछ के दौरान कहा है कि फ़ोन पर उनकी बातचीत के दो ब्यौरे सामने आए हैं उनमें से कुछ तो ठीक हैं लेकिन कुछ के साथ छेड़छाड़ की गई है.

कुछ समय पहले नीरा राडिया की विभिन्न उद्योगपतियों, राजनीतिज्ञों, अधिकारियों और पत्रकारों से फ़ोन पर हुई बातचीत के ब्यौरे मीडिया में प्रकाशित हुए थे.

इस बातचीत के बाद से ही 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में नीरा राडिया की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे.

सोमवार को पीएसी ने नीरा राडिया से दो घंटे तक पूछताछ की है. वे 11 बजे अपने दो वरिष्ठ सहयोगियों के साथ संसद भवन पहुँचीं थीं.

जबकि रतन टाटा से समिति की पूछताछ लगभग तीन घंटे तक चलती रही.

एक सदस्य के अनुसार समिति ने रतन टाटा से पूछा कि जब सीडीएमए में टाटा का वर्चस्व पर्याप्त था तो फिर कंपनी ने जीएसएम के क्षेत्र में जाने का फ़ैसला क्यों किया?

रतन टाटा तीन बजे संसद भवन पहुँचे. उनसे पीएसी ने यह भी जानना चाहा कि क्या अपने पक्ष में ख़बरें प्रकाशित करवाने के लिए भुगतान किया जाता रहा है?

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