टू जी लाइसेंस मामले में पूछताछ

  • 4 अप्रैल 2011
रतन टाटा
Image caption रतन टाटा से भी संसदीय समिति पूछताछ कर सकती है.

टू जी लाइसेंस आवंटन में हुई कथित धांधली के मामले में संसद की एक समिति कई नामी गिरामी उद्योगपतियों से पूछताछ करने वाली है.

संसदीय समिति की जांच सोमवार से शुरु हो रही है और यह समिति रतन टाटा और अनिल अंबानी समेत कई और लोगों को पूछताछ के लिए बुला रही है.

टू जी मामले की जांच संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी कर रही है और इसके लिए संयुक्त संसदीय समिति का भी गठन किया जा चुका है.

पुलिस की जांच के अनुसार 2007-08 में 122 टू जी लाइसेंस जारी किए गए जिसकी प्रक्रिया में व्यापक धांधली हुई और रिश्वत भी दी गई.

इसी मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा सीबीआई की हिरासत में हैं और उनके ख़िलाफ़ शनिवार को आरोपपत्र भी दायर किया गया है.

राजा पर षडयंत्र, धोखाधड़ी और जालसाज़ी के आरोप लगाए गए हैं.

राजा के कार्यकाल के दौरान जो लाइसेंस आवंटित हुए उनमें कई ऐसी फर्में थीं जिनको दूरसंचार मामलों का कोई अनुभव नहीं था. इतना ही नहीं कैग रिपोर्ट के अनुसार इसकी पूरी प्रक्रिया में न तो पारदर्शिता बरती गई और न ही नियमों का पालन किया गया.

कैग रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसी कंपनियों को लाइसेंस मिले जो इसके लिए योग्य नहीं थीं जिसके कारण सरकार को अनुमानित 170 हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

पुलिस ने पूर्व मंत्री राजा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उन दो छोटी फर्मों से घूस लिया जो टेलीनॉर और एटिसलट के स्थानीय पार्टनर थे.

दूरसंचार मंत्रालय अभी इस बात पर विचार कर रहा है कि कैग रिपोर्ट में जिन 85 लाइसेंसों पर आपत्ति जताई गई है, क्या उन्हें रद्द कर किया जाए या नहीं.

इस मामले में देश की कई बड़ी फ़र्मों से सवाल जवाब किया जा चुका है जिसमें रिलायंस एडीए ग्रुप के अनिल अंबानी, एस्सार ग्रुप के प्रशांत रुइया जैसे लोग शामिल हैं.

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