कंपनियों के बयान विरोधाभासी: पीएसी

अनिल अंबानी
Image caption अनिल अंबानी की कंपनी पर भी स्पेक्ट्रम आवंटन को प्रभावित करने का आरोप है

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के मामले की जाँच कर रही लोकलेखा समिति (पीएसी) ने मंगलवार को रिलायंस कम्युनिकेशन के प्रमुख अनिल अंबानी और कई अन्य टेलीकॉम कंपनियों के प्रमुखों से पूछताछ की है.

जिन और लोगों से पीएसी ने पूछताछ की है उनमें इटीसैलेट डीबी टेलीकॉम के के निदेशक विनोद गोयनका और मुख्यकार्यकारी अधिकारी अतुल झंब, एस-टेल के निदेशक श्रीनिवासन और यूनिटेक वायरलेस के प्रमुख संजय चंद्रा और टेलीनॉर एशिया के निदेशक चार्ल्स वुडवर्थ शामिल हैं.

इटीसैलेट डीबी वही कंपनी है जिसका नाम पहले स्वान टेलीकॉम हुआ करता था.

इससे पहले पीएसी ने सोमवार को शीर्ष उद्योगपति रतन टाटा और कॉर्पोरेट दलाल नीरा राडिया से पूछताछ की थी.

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जाँच पीएसी कर रही है और इसके लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का भी गठन किया जा चुका है.

पुलिस की जांच के अनुसार 2007-08 में 122 कंपनियों को 2जी लाइसेंस जारी किए गए जिसकी प्रक्रिया में व्यापक धांधली हुई और रिश्वत भी दी गई.

इसी मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा सीबीआई की हिरासत में हैं और उनके ख़िलाफ़ शनिवार को आरोपपत्र भी दायर किया गया है.

राजा पर षडयंत्र, धोखाधड़ी और जालसाज़ी के आरोप लगाए गए हैं.

राजा के कार्यकाल के दौरान जो लाइसेंस आवंटित हुए उनमें कई ऐसी फर्में थीं जिनको दूरसंचार मामलों का कोई अनुभव नहीं था. इतना ही नहीं कैग रिपोर्ट के अनुसार इसकी पूरी प्रक्रिया में न तो पारदर्शिता बरती गई और न ही नियमों का पालन किया गया.

कैग रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसी कंपनियों को लाइसेंस मिले जो इसके लिए योग्य नहीं थीं जिसके कारण सरकार को क़रीब 170 हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

बयानों में अंतर

इस पूछताछ के बाद वरिष्ठ भाजपा नेता और पीएसी के प्रमुख मुरली जोशी ने बताया कि अनिल अंबानी और इटिसलेट के अधिकारियों ने काफ़ी खुलकर बातें कहीं और समिति के सवालों के जवाब दिए.

उनका कहना था कि अनिल अंबानी ने एक दो बार यह कहकर जवाब नहीं दिया कि यह मामला न्यायालय में है या फिर कहा कि वे कागज़ात देखकर वे जवाब दे देंगे.

पीएसी के अनुसार अनिल अंबानी कल-परसों में कागज़ात भिजवा देंगे. ईटीसीलेट से भी कागज़ात मांगे हैं.

अनिल अंबानी से पीएसी ने दो घंटे पूछताछ की.

पीएसी के अध्यक्ष जोशी ने कहा, "विनोद गोयनका और अनिल अंबानी ने समिति से कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में नाम है और प्रार्थना की कि उनसे ऐसी बात न पूछी जाए जो बात उनके ख़िलाफ़ मुकदमे इस्तेमाल हो या ऐसे सवालों का जवाब देने के लिए बाध्य न किया जाए जिसका संबंध मुक़दमे से हो."

Image caption रतन टाटा के सहयोग पर पीएसी ने संतोष ज़ाहिर किया है

उनका कहना था कि यूनिटेक वायर के प्रमुख संजय चंद्रा ने भी यही बात कही.

उनका कहना था कि सुबह की बातचीत में विनोद गोयनका लगभग चुप रहे क्योंकि उनका कहना था कि वे बाद में टेलीकॉम के व्यवसाय में आए इसलिए वे बहुत कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं. उनकी ओर से कंपनी के मुख्यकार्यकारी अधिकारी अतुल झंब और क़ानूनी प्रतिनिधि जवाब दिए.

पीएसी अध्यक्ष का कहना है, "इन सभी कंपनियों ने एक सी ग़लतियाँ कीं. कंपनी आज बनाई गई और चार पाँच दिन बाद उसमें धन डाला गया. इन कंपनियों के मेमोरेंडम ऑफ़ एसोसिएशन में टेलीकम्यनिकेशन है ही नहीं. वह बाद में डाली गई है."

उनका कहना था, "इन अनियमितताओं के बारे में कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जवाब दिए लेकिन इनके जवाब मंत्रालय और कैग के कथन से मेल नहीं खाते, हम इसकी तुलना करेंगे और इसके बारे में जाँच करेंगे."

पीएसी की जाँच अभी जारी रहेगी.

इस बीच पीएसी और संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के बीच कार्यक्षेत्र और अधिकारक्षेत्र का विवाद तूल पकड़ता जा रहा है.

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