सरकार और हज़ारे समर्थकों में ठनी

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लोकपाल विधेयक को लेकर आमरण अनशन कर रहे अन्ना हज़ारे के समर्थकों और सरकार के बीच बातचीत में कुछ मुद्दों पर सहमति तो बनी है लेकिन अब भी कई मुद्दों पर विवाद बना हुआ है. सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश और आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल के साथ केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने दो दौर की बातचीत की.

सरकार लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने को लेकर संयुक्त समिति बनाने को तैयार हो गई है. लेकिन हज़ारे समर्थक इस संबंध में तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग की है.

कपिल सिब्बल का कहना है कि अधिसूचना को लेकर अब भी दोनों पक्षों में मतभेद हैं और इस मुद्दे पर भी मतभेद है कि क्या अन्ना हज़ारे को इस संयुक्त समिति का चेयरमैन बनाया जाए.

नई दिल्ली में पत्रकारों के साथ बातचीत में कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे को और समय की ज़रूरत है.

इस बीच अन्ना हज़ारे ने घोषणा की है कि जब तक उनकी बातें मानी नहीं जातीं वे अनशन जारी रखेंगे.

धीरे-धीरे उनको मिलने वाला समर्थन बढ़ रहा है.

ट्विटर और फ़ेसबुक पर समर्थन

एक ओर उनके साथ आमरण अनशन करने वालों की संख्या दो सौ से अधिक हो चुकी है दूसरी ओर बंगलौर, जयपुर, चंडीगढ़, लखनऊ, पुणे और मुंबई सहित देश के कई शहरों में उनके समर्थन में प्रदर्शन हुए हैं और समाज के अलग-अलग वर्गों से समर्थन के बयान आ रहे हैं.

इंटरनेट पर ट्विटर और फ़ेसबुक सहित कई सोशल नेटवर्क पर भी अन्ना हज़ारे के आंदोलन को मिल रहा समर्थन व्यापक रुप लेता जा रहा है.

आमिर ख़ान ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अन्ना हज़ारे की मांगों पर ग़ौर करने का अनुरोध किया है. इसके अलावा कई और फ़िल्मी कलाकारों ने इस आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है.

कुछ राजनीतिक नेताओं ने अन्ना हज़ारे के आंदोलन में शामिल होने की कोशिश की लेकिन वहाँ बैठे कार्यकर्ताओं ने उनका ज़ोरदार विरोध किया और वापस लौटने पर मजबूर कर दिया.

इस बीच आंदोलन का असर दिखना शुरु हो गया है और इसकी शुरुआत मंत्रिमंडल समूह से शरद पवार के इस्तीफ़े से हुई है.

बातचीत शुरु

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने अन्ना हज़ारे प्रतिनिधियों स्वामी अग्निवेश और अरविंद केजरीवालसे बातचीत की है.

कपिल सिब्बल के अनुसार बुधवार की रात पहले दौर की और गुरुवार को दूसरे दौर की बातचीत हुई.

हालांकि कपिल सिब्बल और स्वामी अग्निवेश दोनों ने बातचीत को सकारात्मक बताया था. लेकिन जब दोनों प्रतिनिधियों ने लौटकर अन्ना हज़ारे से बातचीत की उसके बाद अरविंद केजरीवाल ने सरकार के सभी प्रस्तावों को धरना स्थल पर मौजूद समर्थकों के सामने रखा और समर्थकों ने सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया.

अरविंद केजरीवाल ने समर्थकों को जो बताया उसके अनुसार अन्ना हज़ारे की ओर से कहा गया था कि एक समिति का गठन किया जाए जिसमें नागरिक समाज के लोग शामिल हों और यह समिति 20 जून तक लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार कर ले जिसे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सके.

उन्होंने बताया कि लेकिन सरकार की ओर से कहा गया है इसकी कोशिश की जाएगी और सरकार के इस प्रस्ताव को समर्थकों ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया.

उनका कहना था कि सरकार का कहना है कि वह समिति के गठन के लिए तैयार है लेकिन वह इस समिति का अधिसूचित नहीं करेगी यानी यह समिति अनौपचारिक समिति होगी और मंत्रालय के लिए सलाहकार का काम भर करेगी.

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जैसा कि अरविंद केजरीवाल ने बताया कि वे चाहते हैं कि यह समिति औपचारिक समिति हो और सरकार इसकी अधिसूचना जारी करे. समर्थकों ने इस प्रस्ताव का भी ध्यनिमत से समर्थन किया.

सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि जो समिति बनेगी उसके अध्यक्ष प्रणव मुखर्जी होंगे लेकिन अन्ना हज़ारे के समर्थकों ने सरकार के इस प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया और कहा कि वे चाहते हैं कि समिति के अध्यक्ष अन्ना हज़ारे हों.

अरविंद केजरीवाल के अनुसार सरकार ने कहा है कि समिति की बैठक 13 मई के पहले नहीं हो पाएगी क्योंकि इससे पहले मंत्री चुनाव में व्यस्त हैं.

इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे चाहते हैं कि इसकी बैठकें तुरंत हों.

उन्होंने व्यंग्य के साथ पूछा, "मंत्री वोट मांगने कौन सा मुँह लेकर जाएँगे?"

उन्होंने अपील की है कि जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं वहाँ जनता को चाहिए कि वे मंत्री से पूछें कि लोकपाल विधेयक का क्या हुआ और उनसे कह दें कि पहले वे विधेयक पारित करें फिर वोट मांगने आएँ.

इसके बाद अन्ना हज़ारे ने एक बार फिर कहा है कि जब तक ये मांगें मानी नहीं जातीं उनका अनशन जारी रहेगा.

तीसरा दिन

अन्ना हज़ारे भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार की ओर से प्रस्तावित लोकपाल विधेयक में परिवर्तन की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सरकारी विधेयक में व्यापक बदलाव के सुझाव दिए हैं और एक वैकल्पिक विधेयक का मसौदा पेश किया है जिसे जन-लोकपाल विधेयक का नाम दिया गया है.

जन-लोकपाल विधेयक को लागू करने की मांग को लेकर पाँच अप्रैल से वे दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं.

महात्मा गांधी की समाधि राजघाट से एक रैली निकालकर वे जंतर मंतर पहुँचे. उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल और संदीप पांडे सहित सैकड़ों लोग थे.

जंतर मंतर में धरना स्थल पर अन्ना हज़ारे और उनके साथ आमरण अनशन पर बैठे लोगों के स्वास्थ्य की नियमित जाँच की जा रही है.

बुधवार को अन्ना हज़ारे ने यूपीए की चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी आड़े हाथों लिया.

सरकार की ओर से क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने बयान दिया है कि सरकार इस पर चर्चा करने को तैयार है.

ख़बरें हैं कि बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी अन्ना हज़ारे के आंदोलन पर चर्चा हुई.

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