लोकपाल बिल पर अन्ना की जीत,झुक गई केंद्र सरकार

  • 8 अप्रैल 2011
अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट Reuters (audio)
Image caption आख़िरकार अन्ना की जीत हुई. सरकार ने उनकी सारी बातें मान लीं.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे वरिष्ठ गांधीवादी अन्ना हज़ारे और केंद्र सरकार के बीच जारी गतिरोध शुक्रवार रात ख़त्म हो गया.

शुक्रवार देर रात उन्होंने एलान किया कि सरकार ने उनकी सारी मांगें मान ली है. लेकिन जब तक सरकार के आदेश की कॉपी उनके हाथ में नहीं आ जाती तब

तक उनका अनशन जारी रहेगा. उम्मीद है कि शनिवार की सुबह सरकार आदेश जारी कर देगी.

शायद इसीलिए उन्होंने शनिवार को सुबह दस बजे अनशन तोड़ने का फ़ैसला किया है. सरकार से समझौता होने के बाद अन्ना ने कहा कि ये जनता की जीत है.

अन्ना ने कहा,'' सरकार ने जिस तरह से सारी बातें मान ली है मुझे लगता है कि ये पूरे भारत की जनता की जीत है.''

समझौते के अनुसार नए लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार 10 सदस्यीय संयुक्त समिति बनाने के लिए तैयार हो गई है जिसमें पांच लोग नागरिक समाज के प्रतिनिधि होंगे और पांच लोग सरकार की तरफ़ से होंगे. वित्त मंत्री और केंद्र सरकार के संकटमोचक प्रणब मुखर्जी इस संयुक्त समिति के अध्यक्ष होगें.

सरकार की तरफ़ से दूसरे सदस्यों में मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, क़ानून मंत्री वीरप्पा मोईली, गृह मंत्री पी चिदंबरम और जल संसाधन मंत्री सलमान ख़ुर्शीद शामिल हैं.

आंदोलनकारियों की तरफ़ से ख़ुद अन्ना हज़ारे के अलावा अरविंद केजरीवाल, कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री शांति भूषण शामिल होंगे.शांति भूषण संयुक्त समिति के सह अध्यक्ष भी होगें.

जल्द है संयुक्त समिति की बैठक होगी और उम्मीद है कि सरकार संसद के मॉनसून सत्र में इस बिल को संसद में पेश करेगी.

'लोकतंत्र की जीत'

इस समझौते में सरकार की ओर से सबसे अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये भारत के लोकतंत्र की ताक़त को दर्शाता है.

सिब्बल ने कहा, '' मुद्दा ये नहीं है कि किसकी जीत और किसकी हार हुई है. इससे पता चलता है कि भ्रष्टाचार की लड़ाई में पूरा देश एक साथ हैं''.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जमकर तारीफ़ करते हुए सिब्बल ने कहा कि उन दोनों की उदारदिली की वजह से ये समझौता संभव हो पाया है.

इस अभियान में अन्ना के क़रीबी सहयोगी रहे पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री और शांति भूषण ने कहा कि लोकतंत्र में कितनी शक्ति होती है ये अन्ना हज़ारे और उनके समर्थकों ने साबित कर दिया है.

उन्होंने कहा,''77 के बाद से ये पहली इतनी बड़ी जीत है. अगर जनता अपनी शक्ति पहचान ले और शांतिपूर्ण तरीक़े से अपनी बात रखे तो सरकार को झुकना ही पड़ेगा.''उन्होंने विश्वास जताया कि जब ये बिल संसद में पेश किया जाएगा तब ये सर्वसम्मति से पास होगा.

इससे पहले इस नतीजे तक पहुंचने से पहले शुक्रवार दिन भर बैठकों और बातचीत का दौर चलता रहा.

सुबह में दोनों पक्षों के बीच बातचीत नहीं हुई. दोपहर तक गतिरोध जारी रहा, लेकिन शाम होते होते ख़बरें आने लगीं कि सरकार आंदोलनकारियों की ज़्यादातर मांगें मानने को राज़ी हो गई.

शाम को कपिल सिब्बल के घर पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई.अन्ना हज़ारे की ओर से अरविंद केजरीवाल,किरण बेदी और स्वामी अग्निवेश बातचीत में शामिल हुए जबकि सरकार की ओर से कपिल सिब्बल,क़ानून मंत्री वीरप्पा मोईली और जल संसाधन मंत्री सलमान ख़ुर्शीद शामिल थे.

कपिल सिब्बल के घर से बाहर निकलते हुए स्वामी अग्निवेश ने पत्रकारों से कहा कि कुछ ही देर में अन्ना हज़ारे जी कुछ घोषणा करने वाले हैं जिनसे सभी ख़ुश होंगे लेकिन वो घोषणा हुई पूरे दो घंटे के बाद रात में 10 बजे के आस पास.

अन्ना हज़ारे की घोषणा के बाद जंतर मंतर पर मौजूद लोगों ने जश्न मनाना शुरु कर दिया.

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