गतिरोध जारी, 12 अप्रैल को जेल भरो आंदोलन

  • 8 अप्रैल 2011
अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट Reuters (audio)

लोकपाल बिल पर सरकार और अन्ना हज़ारे के बीच अब भी गतिरोध जारी है. शुक्रवार सुबह केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने पत्रकारों को बताया कि सरकार अब भी ड्राफ़्टिंग समिति के लिए अधिसूचना जारी करने के लिए तैयार नहीं है.

उन्होंने सिविल सोसाइटी की तरफ़ किसी व्यक्ति को 'संयुक्त ड्राफ़्टिंग समिति' का चेयरमैन बनाए जाने की मांग को भी एक ढंग से ठुकरा दिया. सिबल ने कहा सिविल सोसाइटी की तरफ़ से अध्यक्ष होने की सूरत में कोई मंत्री इसका हिस्सा नहीं होगा.

इस बीच दिल्ली के जंतर मंतर पर अन्ना हज़ारे के साथ अनशन पर बैठे पांच लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया है.

लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए समिति के गठन की आधिकारिक अधिसूचना और अध्यक्ष पद सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि को देना स्वामी अग्निवेश और अरविंद केजरीवाल की दो प्रमुख मांगें हैं.

उधर अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अगर लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने पर कोई सहमति नहीं होती है तो 12 अप्रैल को देश भर में 'जेल भरो आंदोलन' का आयोजन किया जाएगा.

शुक्रवार सिबल ने पत्रकारों को बताया कि शुक्रवार सुबह स्वामी अग्निवेश और अरविंद केजरीवाल उनसे मिलने वाले थे लेकिन उनके ना आने पर सिबल ने उन्हें फोन किया.

कपिल सिब्बल ने कहा, “सरकार समिति के गठन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की स्थिति में नहीं है. लेकिन हम एक आधिकारिक पत्र जारी करने के लिए तैयार हैं. ”

सिब्बल ने कहा कि सरकार सिविस सोसाइटी के किसी नुमाइंदे को संयुक्त ड्राफ़्टिंग समिति के चेयरमैन बनाने के पक्ष में भी नहीं है.

उन्होंने कहा, “लेकिन अगर सिविल सोसाइटी अपना चेयरमैन बनना ही चाहती है तो उस सूरत सरकार का कोई मंत्री संयुक्त समिति का सदस्य नहीं होगा. उनके स्थान पर सरकारी अधिकारी समिति के सदस्य होंगे.”

कपिल सिबल ने कहा कि शुक्रवार शाम छह बजे एक बार फिर सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक होगी.

विकेंद्रीकरण ना होने से बढ़ा भ्रष्टाचार

उधर अन्ना हज़ारे ने शुक्रवार सुबह कहा कि वे ड्राफ़्टिंग समिति का चेयरमैन नहीं बनना चाहते, हालांकि वे समिति में सलाहकार के रूप में बनने के तैयार हैं.

दिल्ली के जंतर मंतर पर जमा लोगों को संबोधित करते हुए हज़ारे ने कहा सत्ता का विकेंद्रीकरण ना होना ही भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है.

अन्ना हज़ारे ने फिर दोहराया कि लोकपाल बिल के लिए संघर्ष आज़ादी की दूसरी लड़ाई है.

उन्होंने कहा, "ये किसी व्यक्ति, पक्ष-विपक्ष का प्रश्न नहीं. ये तो आज़ादी की दूसरी लड़ाई है. इस लड़ाई में जनता को सही आज़ादी मिलनी चाहिए. "

अन्ना हज़ारे ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार बढ़ने के तीन कारण हैं, " क़ानून बड़े कमज़ोर हैं, डर नहीं लगता भ्रष्टाचार करने वालों को. दूसरे सरकार चलाने वाले बहुत से लोग भ्रष्टाचारियों का साथ देते हैं. तीसरा कारण है कि देश में आज़ादी के बाद से सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं होना. गांधी जी कहते थे कि जबतक विकेंद्रीकरण नहीं होगा, जनता के हाथ में शासन नहीं आएगा. "

उन्होंने कहा लोकपाल बिल सत्ता के विकेंद्रीकरण का ज़रिया हो सकता है.

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