सरकार से सहमति, अन्ना ने अनशन तोड़ा

  • 9 अप्रैल 2011
अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट Reuters (audio)

जनलोकपाल विधेयक को लेकर सरकार और अन्ना हज़ारे के बीच रात को हुए समझौते के बाद अन्ना हज़ारे ने अपना आमरण अनशन तोड़ दिया है. अन्ना ने पहले उन लोगों का अनशन तुड़वाया जिन्होंने उनके साथ व्रत रखा था और उसके बाद अपना अनशन तोड़ा.

अन्ना ने एक छोटी बच्चों के हाथों पानी पीकर अपना अनशन तोड़ा. लोगों को संबोधित करते हुए अन्ना ने कहा, "ये मेरी नहीं आप सबकी जीत है.इस आंदोलन में युवा शक्ति का शामिल होना उम्मीद की किरण है. अब हमारी ज़िम्मेदारी बढ़ गई, हमें लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करना है ये पहली चुनौती है. दूसरा संघर्ष है मसौदा बनने के बाद मंत्रिमंडल इसे मंज़ूर करे. तीसरा संघर्ष है लोक सभा में मंज़ूर करवाना. सत्ता का विकेंद्रीकरण की माँग हमारा एक और लक्ष्य है."

सरकार ने विधेयक से संबंधित समिति गठित करने को लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी है. जंतर मंतर पर अधिसूचना की एक कॉपी लोगों को दिखाई.

अनशन तोड़ने के मौके पर दिल्ली के जंतर मंतर पर किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल, मेधा पाटकर और स्वामी अग्निवेश समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे.जिन लोगों ने अन्ना के साथ अनशन किया था उनके साथ अलग से तीन बजे बैठक की जाएगी.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे वरिष्ठ गांधीवादी अन्ना हज़ारे और केंद्र सरकार के बीच जारी गतिरोध शुक्रवार रात ख़त्म हुआ था.

अन्ना ने शुक्रवार रात को घोषणा की थी कि वे शनिवार सुबह अपना अनशन समाप्त कर देंगे. हालांकि उनका कहना था कि सरकार के आदेश की कॉपी देखने के बाद ही वे ऐसा करेंगे. अनशन तोड़ने की ख़बर के मिलते ही जंतर-मंतर में जमा लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.

इस अवसर पर स्वामी अग्निवेश ने कहा, "लोगों ने एकजुटता का परिचय दिया है. इस जीत का सारा श्रेय लोगों को जाता है. लेकिन लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है बल्कि शुरु हुई है. सरकारी अधिसूचना तो कागज़ का टुकड़ा है इसमें अपने संघर्ष से जान डालनी पड़ेगी."अन्ना हज़ारे मंगलवार को आमरण अनशन पर गए थे.

समझौता

समझौते के अनुसार नए लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार 10 सदस्यीय संयुक्त समिति बनाएगी. इसमें पांच लोग नागरिक समाज के प्रतिनिधि होंगे और पांच लोग सरकार की तरफ़ से होंगे. चेयरमैन का पद सरकार के पास रहेगा तो वाइस चेयरमैन नागरिक समाज का होगा.

सरकार की तरफ़ से प्रणब मुखर्जी, मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, क़ानून मंत्री वीरप्पा मोईली, गृह मंत्री पी चिदंबरम और जल संसाधन मंत्री सलमान ख़ुर्शीद शामिल हैं.

आंदोलनकारियों की तरफ़ से ख़ुद अन्ना हज़ारे के अलावा अरविंद केजरीवाल, कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री शांति भूषण शामिल होंगे.शांति भूषण संयुक्त समिति के सह अध्यक्ष भी होगें.

जल्द है संयुक्त समिति की बैठक होगी और उम्मीद है कि सरकार संसद के मॉनसून सत्र में इस बिल को संसद में पेश करेगी.

'लोकतंत्र की जीत'

इस समझौते में सरकार की ओर से सबसे अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये भारत के लोकतंत्र की ताक़त को दर्शाता है.

सिब्बल ने कहा, '' मुद्दा ये नहीं है कि किसकी जीत और किसकी हार हुई है. इससे पता चलता है कि भ्रष्टाचार की लड़ाई में पूरा देश एक साथ हैं''.

उन्होंने बताया कि कोशिश होगी कि 30 जून तक मसौदा तैयार करने का काम ख़त्म कर लिया जाएगा.

इस अभियान में अन्ना के क़रीबी सहयोगी रहे पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री और शांति भूषण ने कहा कि लोकतंत्र में कितनी शक्ति होती है ये अन्ना हज़ारे और उनके समर्थकों ने साबित कर दिया है.

उन्होंने कहा,''77 के बाद से ये पहली इतनी बड़ी जीत है. अगर जनता अपनी शक्ति पहचान ले और शांतिपूर्ण तरीक़े से अपनी बात रखे तो सरकार को झुकना ही पड़ेगा."

इस नतीजे तक पहुंचने से पहले शुक्रवार दिन भर बैठकों और बातचीत का दौर चलता रहा.सुबह में दोनों पक्षों के बीच बातचीत नहीं हुई थी. दोपहर तक गतिरोध जारी रहा, लेकिन शाम होते होते ख़बरें आने लगीं कि सरकार आंदोलनकारियों की ज़्यादातर मांगें मानने को राज़ी हो गई. देर रात समझौते की पुष्टि हुई.

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