समिति के सदस्यों पर विवाद

  • 10 अप्रैल 2011

लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर अन्ना हज़ारे के समर्थन में आने वाले योग गुरु बाबा रामदेव ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि विधेयक के लिए गठित समिति में शांति भूषण के होने पर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर आपत्ति नहीं है.

उनका कहना था कि लोगों ने इस पर सवाल उठाए थे और उन्होंने लोगों की बात आगे पहुंचाई है.

विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए नागरिक समाज की ओर से पांच सदस्य हैं जिनमें पूर्व क़ानून मंत्री शांति भूषण और उनके बेटे प्रशांत भूषण भी हैं.

प्रतिक्रिया

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा है कि इस समय मकसद लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करना है और समिति में कौन है कौन नहीं इस पर बहस नहीं होनी चाहिए. हज़ारे ने कहा कि वे इस बारे में बाबा रामदेव से बात करेंगे कि देश हित में वे इस सवाल को न उठाएँ.

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने लोकपाल विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने के लिए 15 अगस्त की समयसीमा रखी है.

लोकपाल विधेयक को लेकर पांच दिनों तक आमरण अनशन पर बैठने वाले अन्ना हज़ारे ने शनिवार सुबह अपना व्रत तोड़ा.

केंद्र सरकार ने शुक्रवार देर रात उनकी सारी माँगे मान ली थीं जिसके बाद अन्ना अनशन तोड़ने पर राज़ी हुए.

समझौते के तहत सरकार ने लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए संयुक्त समिति के गठन पर अधिसूचना जारी कर दी है. इस समिति में सरकार के और नागरिक समाज दोनों के नुमाइंदे होंगे.

चुनावी सुधार

अनशन ख़त्म होने के बाद अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अभी लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है.

उन्होंने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा था, “ये शुरुआत भर है. अगर लोकपाल विधेयक 15 अगस्त तक पारित नहीं होता है तो मैं लोगों के साथ मिलकर दोबारा आंदोलन की शुरुआत करुँगा.”

अन्ना हज़ारे ने ये भी स्पष्ट कर दिया कि वे चुनावी प्रक्रिया में सुधारों का मुद्दा भी आने वाले दिनों में उठाएँगे.

उनका कहना था, “हम चाहते हैं कि अगर सरपंच या ऐसे पदों पर बैठे लोग अपना काम ठीक से नहीं करते तो नागरिकों के पास उन्हें हटाने का अधिकार होना चाहिए.”

पीटीआई के मुताबिक जन उनसे पूछा गया कि कुछ लोगों ने विरोध करने के उनके तरीके पर सवाल उठाए हैं तो हज़ारे ने कहा कि उन्हें ऐसा करना पड़ा क्योंकि सरकार ने लोकपाल पर उनके पत्रों का जवाब नहीं दिया था.

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