तमिलनाडु: चुनावी प्रचार अपने चरम पर

  • 11 अप्रैल 2011

तमिलनाडु में 234 सदस्यों वाली विधान सभा सीटों के चुनाव के लिए सोमवार को प्रचार अभियान का आख़िरी दिन है. इसके साथ ही अलग-अलग पार्टियों का प्रचार अपने चरम पर पहुंच गया है.

इन चुनाव में असल मुक़ाबला सत्तारूढ़ दल डीएमके और मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले दो गठबंधनों के बीच हो रहा है.

जहाँ डीएमके के गठबंधन में कांग्रेस, वीसीके, पी एमके और मुस्लिम लीग जैसे दल शामिल हैं वहीं एआईएडीएमके के साथ अभिनेता विजयकांत की डीएमडीके और एक नया मुस्लिम राजनितिक दल है.

कागज़ों पर एआईएडीएमके की तुलना में डीएमके का गठबंधन ज़्यादा शक्तिशाली दिखाई दे रहा है क्योंकि एआईएडीएमके और उसके मित्र दलों के बीच अच्छे तालमेल की कमी साफ़ दिखाई दे रही है.

दो गठबंधनों के साथ-साथ यह दो शक्तिशाली व्यक्तियों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई भी है.

एक ओर 86 वर्षीय मुत्तुवेलु करूणानिधि हैं जो 12वीं बार विधान सभा के लिए और छठवीं बार मुख्यमंत्री पद के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं.

ज्यादा आयु और स्वास्थ्य की कमज़ोरी के बावजूद, करुणानिधि चुनाव अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं और अपनी वातानुकूलित गाड़ी के अंदर से ही चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे हैं.

जहाँ एआईएडीएमके के गठबंधन के अभियान की ज़िम्मेदारी अधिकतर जे जयललिता के कंधों पर ही रही है और उन्होंने लगभग पूरे तमिलनाडु का चुनावी दौरा किया है वहीं डीएमके गठबंधन के अभियान में कई महत्वपूर्ण नेताओं ने भाग लिया है.

कांग्रेस की ओर से सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने चुनावी रैलियां की हैं.

'स्टार' प्रचारक

इसके अलावा केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम भी लगातार चुनावी अभियान में हिस्सा ले रहे हैं.

साथ ही करुणानिधि परिवार के कई सदस्य उनके पुत्र और उपमुख्य मंत्री एमके स्टालिन, दूसरे पुत्र और केन्द्रीय मंत्री अल्लागिरी, पुत्री और राज्य सभा सदस्य कन्नीमोझी और उनके नवासे और केन्द्रीय मंत्री दयानिधि मारण भी अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

इनके साथ तमिल फिल्म जगत के मशहूर हास्य कलाकार और स्टार प्रचारक वादिवेलू ने भी तूफ़ान मचा रखा है. उनकी सभाओं में भारी भीड़ जुट रही है.

जहाँ डीएमके के अभियान में इतने नेता जुटे हैं, वहीं जयललिता अकेले ही उनका डटकर मुक़ाबला कर रही हैं.

पिछले दो दिनों चेन्नई में उनकी सभाओं में ज़बर्दस्त भीड़ जुटी और लोगों ने उत्साह के साथ उनकी बातें सुनीं.

जयललिता ने अपने भाषणों में ज़्यादातर करुणानिधि परिवार के तथाकथित भ्रष्टाचार, सरकार की असफलताओं, ज़रूरी वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि और कानून व्यवस्था की ख़राब हालत को निशाना बनाया है.

जयललिता ने कहा , "हमने अपनी पहली आज़ादी की लड़ाई अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी थी और अब दूसरी आज़ादी की लड़ाई करुणानिधि परिवार की लूटमार के खिलाफ़ लड़नी होगी."

दूसरी ओर करुणानिधि और उनका पूरा परिवार जयलालिता को निशाना बना रहा है और उनसे पूछ रहा है कि उन्हें भ्रष्टाचार पर बात करने का क्या नैतिक अधिकार है, जबकि वो खुद भ्रष्टाचार में लिप्त रही हैं.

टीवी चैनलों का अभियान

नेताओं के साथ साथ उनके टीवी चैनल भी इस अभियान के रंग में पूरी तरह रंगे हैं.

करुणानिधि परिवार का क्लैगनार टीवी और उनके नवासे कलानिधि मारन का सन टीवी ओक तरफ है और दूसरी तरफ है जयललिता का जया टीवी ग्रुप.

यद सभी टीवी चैनल दोनों दलों का खूब प्रचार कर रहे हैं और केवल अपने नेताओं के भाषणों का प्रसारण कर रहे हैं.

दूसरे शहरी इलाकों की तरह चेन्नई में भी एआईएडीएमके का ज़्यादा ज़ोर दिखाई दे रहा है और राजनीतिक जानकार मानते हैं कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के प्रभाव से शहरी इलाकों में एआईएडीएमके को ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है.

चेन्नई में विधान सभा की 16 सीटों हैं और जानकार मानते हैं की इनमें से अधिकतर सीटें जयललिता को मिलेंगी.

वैसे विधान सभा की कुल एक तिहाई सीटें शहरी इलाकों में हैं और वहां डीएमके और एआईएडीएमके के बीच कांटे की टक्कर हो रही है.

लेकिन करुणानिधि और जयललिता दोनों ही इस बार शहरी इलाकों से दूर अपने-अपने गृह नगरों से चुनाव लड़ रहे हैं.

पैसे बांटने का चलन

करुणानिधि अपने गृह स्थान तिरुवरुर से चुनाव लड़ रहे हैं जो की एक ग्रामीण इलाका है और जयललिता श्रीरंगम से चुनाव लड़ रही हैं जहां उनके परिवार की जड़े हैं.

डीएमके ने उनके खिलाफ एक 30 वर्षीय उम्मीदवार आनंद को मैदान में उतारा है.

राजनीतिक पर्यवेक्षक भगवन सिंह का कहना है कि इस चुनाव में ऐसे कई तत्व मौजूद हैं और इस कारण चुनावी नतीजों की भविष्यवाणी करना बहुत मुश्किल है.

सबसे पहली बात तो यह है कि डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ने ही मतदाताओं पर मुफ्त चीज़ें देने के वादों की बारिश कर दी है. दूसरी बात यह है कि मतदाताओं में पैसे बांटने के चलन ने एक अभूतपूर्व स्तर को छू लिया है.

अब तक चुनावी अधिकारी 50 करोड़ रुपए की राशी ज़ब्त कर चुके हैं, लेकिन आम विचार यह है कि कई सौ करोड़ रूपए मतदाताओं को खरीदने पर खर्च हो चुके हैं.

वेल्लोर में एक युवा मतदाता जीपी कुमार ने बीबीसी से कहा कि पैसे के बंटवारे के लिए किसी एक दल को ज़िम्मेदार ठहराना गलत होगा क्योंकि दोनों ही मुख्यदल यह काम कर रहे हैं.

उनक कहना था , "चाहे मतदाताओं में पैसे बांटने की बात हो या फिर मुफ्त में चीज़ें देने के वादे, दोनों ही बातें मतदाताओं को खरीदने के बरबार हैं".

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