सुरक्षा बलों की सुविधाओं पर चिंता

भारतीय सैनिक
Image caption सैनिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री गुरुदास कामत ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को मिल रही सुविधाओं पर चिंता ज़ाहिर की है.

कामत का मानना है कि बस्तर संभाग में तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वो काफ़ी नहीं हैं. इस बारे में उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से भी चर्चा करने की बात कही है.

कामत नक्सल प्रभावित राज्यों के दौरे पर हैं और वह मंगलवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले के ताड़मेटला इलाक़े में पहुंचे, जहाँ पिछले साल छह अप्रैल को नक्सलियों नें घात लगाकर केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के 76 जवानों को मार दिया था.

छत्तीसगढ़ के बाद कामत नक्सल प्रभावित झारखंड और उड़ीसा राज्यों का भी दौरा करेंगे और वहाँ पर तैनात केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के जवानों और अधिकारियों की स्थिति का जायज़ा लेंगे.

रिपोर्ट

अपने दौरे के बाद कामत केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम से मिलकर एक रिपोर्ट सौंपेंगे.

इससे पहले भी नक्सल प्रभावित राज्यों में तैनात केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के जवानों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर राज्य काफ़ी विवाद रहा है.

पिछले साल दंतेवाड़ा के ताड़मेटला और नारायणपुर में नक्सली हमले में अर्ध सैनिक बलों के जवानों के मारे जाने के बाद केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि अर्ध सैनिक बलों के जवान नारकीय स्थिति में रह रहे हैं.

सीआरपीएफ़ की पत्रिका में एक लेख भी छपा जिसमें कहा गया कि छत्तीसगढ़ में तैनात केंद्रीय बलों के जवानों के ना रहने का सही इंतज़ाम है और ना खाने का.

यहाँ तक कि छुट्टी पर जाने वाले जवानों के लिए वाहन भी उपलब्ध नहीं हैं. यही हाल झारखंड का भी है.

अपील

नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा में सीआरपीएफ़ के अलावा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और भारत तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं.

दंतेवाड़ा के दौरे के बाद कामत ने पत्रकारों से बात करते हुए माओवादियों से मुख्य धरा में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा, "जो लोग ग़लती से नक्सली बन गए या जान बूझ कर, मैं उनसे अपील करना चाहता हूँ कि वह सुरक्षा बलों के साथ मिलकर शांति स्थापित करने की दिशा में काम करें."

इसके अलावा कामत का कहना था कि नक्सल प्रभावित इलाक़ों में मोबाइल के टावर लगाने का काम ज़ोर-शोर से किया जाएगा.

दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कामत का कहना था कि नक्सली इलाक़ों में संचार के माध्यम पूरी तरह ध्वस्त हैं. इसलिए इन इलाक़ों में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) युद्ध स्तर पर मोबाइल के टावर लगाने का काम करेगी.

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