मोदी के मुद्दे पर फंसे हज़ारे

  • 14 अप्रैल 2011
अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट Reuters (audio)

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करके सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे मुश्किल में फँस गए हैं.

स्थिति यहाँ तक आ पहुँची है कि भ्रष्टाचार से निपटने की लड़ाई में उनके साथ आने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ता नाराज़गी व्यक्त कर रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे में तो उन्हें अन्ना हज़ारे से अपने रास्ते अलग करने होंगे.

हालांकि अन्ना हज़ारे ने एक बार फिर सफ़ाई दी है कि वे विकास के उन कार्यों की सराहना कर रहे थे जो नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने ग्रामीण इलाक़े में किए हैं.

उन्होंने कहा है कि वे साम्रदायिकता और सांप्रदायिक हिंसा के सख़्त ख़िलाफ़ हैं.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जन-लोकपाल विधेयक के लिए आमरण अनशन कर रहे अन्ना हज़ारे ने चा र दिनों बाद जब अपना अनशन तोड़ा तो अपने भाषण में उन्होंने नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की तारीफ़ की थी.

उसके बाद उनके इस बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया हुई है और अन्ना हज़ारे को लगभग हर दिन सफ़ाई देनी पड़ रही है.

चेतावनी

सुप्रसिद्ध नृत्यांगना और सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ खड़ी रही हैं.

उन्होंने अन्ना हज़ारे के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्ना हज़ारे के साथ हैं लेकिन अगर वे नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हैं तो उन्हें अपना रास्ता अलग करना होगा.

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने भी अन्ना हज़ारे के बयान पर आपत्ति जताई है.

इसी तरह पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) की राष्ट्रीय सचिव कविता श्रीवास्तव ने भी अन्ना हज़ारे के बयान पर आपत्ति जताई है.

एक टेलीविज़न चैनल पर उन्होंने कहा, "वर्ष 2002 में हुए दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी ने आजतक कोई अफ़सोस प्रकट नहीं किया है, वे इन दंगों के मास्टरमाइंड रहे हैं."

इसके अलावा गुजरात के कई संगठनों ने अन्ना हज़ारे के बयान का विरोध किया है.

लोकआंदोलन गुजरात नाम का स्वयंसेवी संगठन चलाने वाले डीके रथ ने स्वामी अग्निवेश को लिखे अपने पत्र में कहा है कि अन्ना हज़ारे के बयान ने मन में आशंकाएँ पैदा कर दी हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा है, "मैं उम्मीद करता हूँ कि आप (अग्निवेश), अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी यह सुनिश्चित करेंगे कि आंदोलन की दिशा न बदले."

इससे पहले नरेंद्र मोदी ने पत्र लिखकर अन्ना हज़ारे को धन्यवाद ज्ञापित किया था और उन्हें आगाह किया था कि उनकी तारीफ़ करने की वजह से वे परेशानी में पड़ सकते हैं.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी अन्ना हज़ारे के बयान की तारीफ़ की थी.

सफ़ाई

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Image caption अन्ना हज़ारे के आंदोलन को देश भर से समर्थन मिला था

लेकिन अन्ना हज़ारे को लगातार सफ़ाई देनी पड़ रही है कि वे सिर्फ़ मोदी के विकास के कार्यों की सराहना कर रहे थे.

उन्होंने मल्लिका साराभाई को लिखे पत्र में एक बार फिर सफ़ाई देते हुए कहा है, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं एक अराजनीतिक व्यक्ति हुँ और सांप्रदायिकता के सख़्त ख़िलाफ़ हूँ."

पीटीआई के अनुसार उन्होंने अपने पत्र में लिखा है,"मुझे दुख है कि मुझे नरेंद्र मोदी के मामले में सफ़ाई देनी पड़ रही है. दिल्ली की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मुझसे गुजराज और बिहार के मुख्यमंत्रियों के विकास कार्यों के बारे में सवाल पूछा गया था और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मैंने कहा था कि बिहार और गुजरात ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अच्छा काम किया है."

उन्होंने कहा, "मैंने उसी समय वर्ष 2002 के दंगों और सांप्रदायिकता की निंदा की थी."

अन्ना हज़ारे ने आम लोगों को भी एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि कुछ लोग भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में दरार पैदा करना चाहते हैं.

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