पंचायती चुनावों में भारी भीड़

कश्मीर में पंचायत चुनाव इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption कश्मीर में पंचायत चुनाव 16 तरणों में होने हैं

कश्मीर की जनता ने पृथकतावादियों के बहिष्कार की अनदेखी करते हुए बुधवार को हुए स्थानीय पंचायत चुनावों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

कश्मीर में लगभग 10 सालों के बाद पंचायत चुनाव करवाए गए हैं.

श्रीनगर स्थित अधिकारियों का कहना है कि 143 पंचायतों में से आठ में तो मतदान का प्रतिशत क़रीब-क़रीब 80 प्रतिशत था.

सूबे के हालात के मद्देनज़र हुकूमत ने चुनाव के लिए अस्सी हज़ार अर्ध-सैनिकों की बहाली की थी.

हूर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने लोगों से चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की थी.

गिलानी ने चुनाव को भारत की उस 'चाल का हिस्सा बताया था जिसके तहत वो दुनिया का ध्यान कश्मीर के असली मुद्दे से हटाना चाहता है.'

पुलिस ने दावा किया था कि दक्षिणी कश्मीर में ऐसे पोस्टर लगाए गए थे जिसमें चुनाव में शामिल होनेवाली जनता को ' गंभीर परिणाम भुगतने' की चेतावनी दी गई थी.

हालांकि किसी भी पृथकतावादी गुट ने इल पोस्टरों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

मेले जैसी भीड़

दक्षिणी कश्मीर के कोईमो ब्लाक में मतदान के शुरूआती दौर में कम भीड़ दिखी. भीड़ दोपहर बाद तक एक मेले की शक्ल में तबदील हो चुकी थी जिसमें परिवार के साथ केंद्र पर आए छोटे बच्चे भी नज़र आए.

एक स्कूल शिक्षक ने कहा, "हमारे चुने हुए विधायक शहरों में जाकर बस जाते है. हम एक स्थानीय व्यक्ति को चुनना चाहते हैं जो हमारी समस्याओं का निपटारा कर सके."

बदगाम में एक महिला वोटर ने कहा कि ऐसा नहीं कि कश्मीर के बाक़ी मुद्दे पूरी तरह से ख़त्म हो गए हैं. लेकिन हमारे मंत्री और विधायक दिल्ली से आई आर्थिक मदद को इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं जबकि पंचायतें ऐसा कर पाएंगी.

चुनाव के पहले चरण में 3500 उम्मीदवार मैदान में हैं.

कश्मीर में 16 चरणों में पंचायत चुनाव करवाए जा रहे हैं.

दूसरे चरण के लिए मतदान 17 अप्रैल को होंगे.

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