दिग्विजय के आरोपों का जवाब

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Image caption दिग्विजय सिंह ने कहा था कि समिति के सदस्यों को लेकर इस तरह से सवाल उठना आपत्तिजनक है

लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति के नागरिक समाज प्रतिनिधि प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

दिग्विजय सिंह ने एक निजी चैनल से साक्षात्कार में अन्ना हज़ारे पर परोक्ष हमला करते हुए कहा था कि उन्होंने लोकपाल बिल बनाने के लिए गठित समिति के सदस्यों का चयन सावधानी पूर्वक नहीं किया.

उन्होंने आरोप लगाया था कि समिति में शामिल शांति भूषण और प्रशांत भूषण को इलाहाबाद में मूल्य से कम प्रॉपर्टी कर देने पर एक नोटिस दिया गया है.

शुक्रवार को अपना पक्ष रखते हुए प्रशांत भूषण ने कहा, "इलाहाबाद में एक प्रॉपर्टी पर हमारा विवाद चल रहा था. पिछले वर्ष हुए समझौते के मुताबिक उस प्रॉपर्टी का एक तिहाई हिस्सा मालिक को दिया गया और घर समेत दो-तिहाई प्रॉपर्टी हमें एक लाख रूपए में बेची गई थी. उस प्रॉपर्टी पर उत्तर प्रदेश स्टैम्प रूल्स के तहत मूल्य से बीस गुना गृह कर देना था. इस हिसाब एक लाख पर 33 हज़ार स्टैम्प ड्यूटी बैठती और हमने इसका बीस गुना यानि छह लाख साठ हज़ार रुपए जमा करवा दिया है."

अरविंद केजरीवाल को सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय का चेला बताते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा था कि केजरीवाल के बजाय अगर अरुणा रॉय समिति का सदस्य होतीं तो बेहतर होता.

इसके जवाब में शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे किसी के चेले नहीं हैं.

केजरीवाल ने कहा,"मैं किसी का चेला नहीं हूं. अरुणा रॉय और अन्ना हज़ारे जैसे वरिष्ठ लोगों से मैंने काफ़ी कुछ सीखा है लेकिन मैं अपने फ़ैसले स्वयं लेता हूं.दिग्विजय सिंह का मुझे चेला कहना शोभा नहीं देता."

अरुणा रॉय को समिति में ना रखे जाने पर केजरीवाल ने कहा कि जिन लोगों जन लोकपाल का मसौदा तैयार किया था वही नागरिक समाज की ओर से इस समिति के सदस्य मनोनीत किए गए है.

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