बिनायक की ज़मानत पर सुनवाई

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Image caption विनायक सेन को स्वास्थ्य क्षेत्र में सराहनीय काम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय जोनाथन मान अवार्ड से सम्मानित किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट आज मानवधिकार कार्यकर्ता और चिकित्सक बिनायक सेन की ज़मानत याचिका की सुनवाई करेगा.

न्यायधीश एचएस बेदी और सीके प्रसाद की खंडपीठ में 11 अप्रैल को इस मामले पर होनेवाली सुनवाई को राज्य सरकार के आग्रह पर चंद दिनों के लिए टाल दिया गया था.

बिनायक सेन को पिछले साल रायपुर की एक अदालत ने माओवादियों से सांठ गांठ रखने, उन्हें सर्मथन देने और राजद्रोह के लिए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

इस आदेश के ख़िलाफ़ उन्होंने बिलासपुर उच्च न्यायालय का दरवाज़ा भी खटखटाया था लेकिन वहाँ उनकी अर्ज़ी ख़ारिज हो गई थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है.

हाई कोर्ट में दाखिल की गई अपील में बिनायक सेन ने कहा था कि अभियोजन पक्ष के कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाने के बावजूद निचली अदालत ने उन्हें दोषी क़रार देकर सज़ा सुनाई है.

विरोध

बिलासपुर उच्च न्यायलय में उनके मामले की पैरवी मशहूर वकील राम जेठमलानी ने की थी.

जेठमलानी भारतीय जनता पार्टी के सांसद भी हैं और छत्तीसगढ़ में उन्हीं की पार्टी की सरकार है.

अदालत मे दाख़िल किए गए अपने हलफ़नामे में छत्तीसगढ़ सरकार ने दावा किया था कि बिनायक सेन ने देश में नक्सलवाद के विस्तार में समर्थन दिया है और इस काम में हर तरह की मदद मुहैया करवाई है.

बिनायक सेन की गिरफ़्तारी और सज़ा का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा विरोध हुआ है और विश्व की जानी मानी हस्तियों ने भारतीय प्रधानमंत्री से उनकी रिहाई की अपील की थी.

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