'काली पोशाक में साफ़ छवि' वाले लोग चाहिए'

एसएच कपाड़िया
Image caption न्यायप्रणाली में भ्रष्टाचार से कपाड़िया चिंतित है.

न्यायाधीशों पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप और इससे न्यायप्रणाली की छवि पर पड़ रहे प्रभाव से चिंतित मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाड़िया ने कहा है कि 'काली पोशाक में साफ़ छवि' के लोगों की ज़रूरत है.

मुख्य न्यायाधीश ने राजनेताओं को भी सलाह दी कि वह कथित रूप से भ्रष्ट जजों का सरक्षंण न करें. उन्होंने पांचवे एम.सी.सेतलवाड मेमोरियल में एक लैक्चर में यह बात कही.

उन्होंने कहा, "हमें काले पोशाक में साफ़ छवि वाले व्यक्ति की ज़रूरत है जो न्यायप्रणाली की स्वतंत्रता और ईमानदारी को बना कर रख सके."

उनकी सलाह थी कि जजों को खुद पर आत्मनियंत्रण रखना चाहिए और वकीलों,राजनीतिक पार्टियों,उनके नेताओं और मंत्रियों से संपर्क में आने से बचना चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश का कहना था कि जजों को समाज के एक बड़े तबके से अलग-थलग रहना चाहिए लेकिन किसी भी प्रकार के समाजिक समारोह में ये लोग मिले तो अलग बात है.

साथ ही उन्होंने कहा कि जजों को अपने से निचली अदालतों को प्रशासनिक काम में दख़ल देने से भी गुरेज़ करना चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश के मुताबिक,"उच्च स्तर के न्यायाधीशों के आंतरिक दखल से किसी भी निचले स्तर के जज का तबादला रूक सकता है या उसकी पदोन्नति के लिए मनाही हो सकती है.इस दख़लअदाज़ी की निंदा की जानी चाहिए."

भ्रष्टाचार

मुख्य न्यायाधीश कपाड़िया का ये वक्तव्य एक ऐसे समय में आया है जब पहले से दो कार्यरत जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए है.

कलकत्ता हाई कोर्ट के जज सेन पर 1984 में 33 लाख रूपए के गबन का आरोप है.अदालत ने उन्हें स्टील ऑथरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के बीच उभरे विवाद में कस्टोडियन या संरक्षक नियुक्त किया था.

कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश दिनाकरन पर पद के दुरुपयोग,भ्रष्टाचार और ज़मीन अधिग्रहण के आरोप हैं.

मुख्य न्यायाधीश कपाड़िया का कहना है कि जजों को किसी भी प्रलोभन से दूर रहना चाहिए और न्यायिक मानकों के तहत काम करना चाहिए.

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