चिंतलनार घटना के विरोध में माओवादियों का बंद

तारमेटला इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption माओवादियों ने ये बंद सुरक्षाबलों के कथित रूप से आदिवासियों के 300 घर जलाने के विरोध में बुलाया गया है.

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में संदिग्ध माओवादियों नें किरन्दूल के पास एनएमडीसी यानि नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की लौह अयस्क की खदान में विस्फोट कर वहां काम कर रहे एक पम्प को उड़ा दिया है.इस विस्फोट के कारण खदान में उत्पादन बाधित हो गया है.

इसके अलावा माओवादियों नें दंतेवाड़ा के बचेली और भांसी रेलवे स्टेशनों के बीच दो स्थानों पर रेल की पटरियों को भी उखाड़ दिया है. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी गुट नें 16 और 17 अप्रैल को दंडकारण्य के इलाक़े में 48 घंटों के बंद का आह्वान किया है.

यह बंद दंतेवाड़ा के चिंतलनार इलाक़े में सुरक्षा बलों द्वारा कथित रूप से आदिवासियों के 300 घर जलाने, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने और कुछ ग्रामीणों की हत्या करने के विरोध में बुलाया गया है.

बंद की वज़ह से पूरे बस्तर संभाग में वाहनों का आवाजाही पूरी तरह ठप्प हो गई है.

ख़बरे हैं कि बस्तर के बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और जगदलपुर के इलाक़ों में कई स्थानों पर माओवादियों नें सड़क पर पेड़ काटकर मार्ग को बाधित कर दिया है.

ये भी ख़बरें आ रहीं हैं कि माओवादियों नें चिंतलनार की घटना के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर पोस्टर भी चिपकाए हैं.

बंद

माओवादियों के बंद के मद्देनज़र प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम करने का दावा किया है. लेकिन बस्तर संभाग के सुदूर इलाक़ों में सुरक्षा बलों के नहीं होने की बातें सामने आ रहीं है.

बंद के साथ साथ माओवादियों नें दंडकारण्य के इलाक़े में आर्थिक नाकेबंदी का भी आह्मन किया है जिसकी वजह से मालवाहक गाड़ियाँ सड़कों पर से नदारद हैं.

नरयन्पुइर, बीजापुर जगदलपुर और कांकेर के ग्रामीण इलाक़ों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद हैं. सड़कों पर वाहनों की ग़ैर मौजूदगी में परीक्षा दे रहे छात्रों को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

बीबीसी को दिए गए बयान में माओवादी गुट की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमिटी नें कहा है कि बंद के दौरान दंडकारण्य के इलाक़े में हर तरह की आर्थिक गतिविधि पर रोक रहेगी.

ठप्प

दंतेवाड़ा में नॅशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की लौह अयस्क की खदानें हैं.

साथ ही निजी क्षेत्र के उपक्रम एस्सार की भी खदानें इस इलाक़ें में स्थित हैं. बंद की वजह से लौह अयस्क की धुलाई पर बुरा असर पड़ा है.

एनएमडीसी के सूत्रों का कहना है कि बंद की वजह से कंपनी को करोड़ों रुपयों का नुक़सान उठाना पड़ रहा है.

कमिटी के प्रवक्ता गुड्सा उर्सेडी का कहना है, "दमन यहाँ के लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है. यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि इस पूरे क्षेत्र को बड़े पूंजीपतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की चारागाह में तब्दील कर दिया जा सके".

गुड्सा ने कहा ,'' यह आदिवासियों के नरसंहार और गाँव दहन का पहला मामला नहीं है.पहले सलवा जुडूम के नाम पर और बाद में ऑपरेशन ग्रीनहंट का नाम लेकर वर्ष 2005 से सुरक्षा बलों नें सैकड़ों गावों में हज़ारों घरों को जलाया है.''

गुड्सा के अनुसार एक ही गाँव को किश्तों में जलाया है. बिअपुर के पास सिर्फ़ 10 गावों में किए गए सर्वेक्षण में पता चला है कि इन इलाक़ों में सुरक्षा बलों नें 74 महिलाओं के साथ बलात्कार किया है."

यह घटना 11 से 14 मार्च के बीच हुई है जब माओवादियों से मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबल के जवान चिंतलनार से वापस लौट रहे थे.

आरोप है कि लौटते वक़्त सुरक्षा बलों नें चिंतलनार के इलाक़े में कुछ गांवों में जमकर उत्पात मचाया. इस क्रम में जवानों ने आदिवासियों के 300 घरों को जलाया, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और कुछ ग्रामीणों की हत्या भी की.

पुलिस के अधिकारी घटना से इनकार करते हुए कहते रहे हैं कि ये सिर्फ़ माओवादियों का 'प्रचार मात्र' है.

लेकिन इस घटना के बाद दंतेवाड़ा के कलेक्टर नें जब न्यायिक जांच के के आदेश दिए तो उससे कई पुलिस के बड़े अधिकारी नाराज़ हो गए.

शायद यही कारण रहा कि पहले तो पुलिस ने आयुक्त और कलेक्टर को राहत सामग्री लेकर जाने से रोका और बाद में पुलिस नें अपना ग़ुस्सा पत्रकारों पर भी निकाला जिनपर पुलिस ने थाने में मामला भी दर्ज किया है.

संबंधित समाचार