अन्ना की चिट्ठी सोनिया के नाम

  • 18 अप्रैल 2011
इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अन्ना हज़ारे को डर है कि भ्रष्टाचार-विरोधी जन लोकपाल विधेयक का काम व्यक्तिगत आक्षेप के चलते पटरी से उतर जाएगा.

अन्ना हज़ारे ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर भ्रष्ट ताकतों पर लोकपाल विधेयक बनाने के कामकाज को पटरी से उतारने का आरोप लगाया है.

उन्होंने पत्र में सोनिया गांधी से पूछा है कि क्या वे उस कांग्रेस महासचिव के बयानों से सहमत हैं जिनसे लोगों को गुमराह किया जा रहा है?

किसी व्यक्ति विशेष का नाम लिए बगैर, अन्ना ने लिखा है, “कांग्रेस पार्टी के एक महासचिव ने पिछले हफ़्ते प्रेस में कई बयान दिए हैं. मैं ये मान कर चल रहा हूँ कि उन्हें पार्टी (कांग्रेस) का समर्थन हासिल है. क्या आप निजी तौर पर उनके (महासचिव के) बयानों से सहमत हैं?”

पिछले हफ्ते कांग्रेस के एक महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक टेलिविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में अन्ना हज़ारे के बारे में कई टिप्पणियां की थीं.

इस साक्षात्कार में अन्ना के व्यक्तित्व, सामाजिक हित से जुड़े उनके काम, जन लोकपाल विधेयक पर उनकी सोच इत्यादि पर कांग्रेस पार्टी का रुख जाना गया था.

साथ ही अन्ना हज़ारे पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी चर्चा हुई थी.

अपने पत्र में अन्ना ने कहा है कि इन बयानों में से ज़्यादातर में पेश किए गए तथ्य ग़लत हैं, जिससे ऐसा आभास होता है कि उनकी (महासचिव की) मंशा लोगों को भ्रमित करना और जनलोकपाल विधेयक पर बनी संयुक्त समिति की चर्चा को पटरी से उतारना है.

नागरिक प्रतिनिधियों पर आक्षेप

अन्ना ने अपने पत्र में ये भी कहा है कि यूपीए सरकार के एक मंत्री ने संयुक्त समिति की पहली बैठक के बाद मीडिया को अपने घर बुलाकर अनौपचारिक तौर पर जानकारी दी.

अन्ना के मुताबिक, “मंत्री के घर पर की गई इस बैठक में पत्रकारों को ये संकेत दिए गए कि नागरिक प्रतिनिधि सरकार के दबाव में आ गए हैं और विधेयक के कमज़ोर प्रारूप पर सहमत होने के लिए तैयार हो गए हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ था”.

अपने पत्र में अन्ना ने जन लोकपाल विधेयक पर चर्चा के लिए बनी समिति के नागरिक प्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने की कोशिशों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है.

उन्होंने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपील की है कि इस प्रक्रिया की अहमियत को देखते हुए वो अपने सहयोगियों को ऐसे व्यक्तिगत आक्षेप करने से रोकें.

गौरतलब है कि मीडिया में एक सीडी में रिकॉर्ड हुई बातचीत के अंश छापे गए थे.

इन ख़बरों के मुताबिक सीडी में वरिष्ठ वकील और संयुक्त समिति के सह-अध्यक्ष शांति भूषण की एक राजनीतिक नेता के साथ आपत्तिजनक बातचीत हुई थी.

लेकिन शांति भूषण और और उनके पुत्र प्रशांत भूषण ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया और सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मानहानि का मुकदमा भी दायर कर दिया.

अन्ना हज़ारे ने पांच अप्रैल को भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक में लोगों की राय लेने की मांग को लेकर अनशन शुरू किया था.

आखिरकार सरकार ने विधेयक पर चर्चा के लिए नागरिक प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त समिति के गठन की मांग मान ली, जिसके बाद नौ अप्रैल को अन्ना ने अनशन खत्म कर दिया.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार