अरूंधति, गिलानी के ख़िलाफ़ शिकायत

Image caption अरुंधति रॉय और सैयद अली शाह गिलानी पर भारत-विरोधी भाषण देने के आरोप में राजद्रोह का मुकदमा चल रहा है.

लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति राय और कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के ख़िलाफ़ राजद्रोह के मामले में दिल्ली पुलिस ने शिकायतकर्ता का बयान दर्ज कर लिया है.

दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अब तक की तहकीकात की रिपोर्ट दी.

इसी अदालत के निर्देश पर पिछले साल नवंबर में दिल्ली पुलिस ने अरुंधति राय और सैयद अली शाह गिलानी के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज किया था.

शिकायतकर्ता सुशील पंडित के वकील विकास पाडोर का कहना है, "छह महीने तक पुलिस ने कुछ नहीं किया, अब आखिरकार तहकीकात में पहला अहम कदम उठाया गया है. हमें उम्मीद है कि अब मामला जल्दी आगे बढ़ेगा."

पाडोर के मुताबिक अब पुलिस इस मामले में सबूत और बयान जुटाकर अदालत में पेश करेगी.

अगर अदालत उन्हें ठोस पाएगी तो अरुंधति राय और सैयद अली शाह गिलानी को सम्मन करेगी.

भारत विरोधी बयानों का आरोप

पिछले साल अक्तूबर में दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में अरुंधति राय और सैयद अली शाह गिलानी ने भाषण दिए थे जिनका सम्मेलन में हिस्सा ले रहे कुछ लोगों ने विरोध किया था.

इनका आरोप था कि भाषण में कही गईं कुछ बातें राजद्रोह के दायरे में आती हैं. इनमें से एक, सुशील पंडित, पुलिस के पास गए और इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करानी चाही.

पुलिस के ऐसा ना करने पर पंडित ने अदालत में याचिका डाली जिसके बाद अदालत ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की हिदायत दी.

अदालत ने यह आदेश अरुंधति राय और सैयद अली शाह गिलानी के कथित भारत विरोधी बयानों की वजह से दिए.

सम्मेलन में अरुंधति रॉय ने कहा था, "कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है. यह ऐतिहासिक तथ्य है. भारत सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है."

उन्होंने आरोप लगाया था कि ब्रितानी शासन से आज़ादी के बाद भारत ख़ुद औपनिवेशिक शक्ति बन गया.

अदालत के इस आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अरुंधति रॉय ने बयान जारी कर कहा था, "शायद उन्हें जवाहरलाल नेहरू पर भी केस दर्ज करना चाहिए."

और इसके बाद अरुधंति रॉय ने कश्मीर पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू कई वक्तव्यों का सिलेसलेवार ब्यौरा भी दिया था.

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