2-जी घोटाले में पांच बड़ी गिरफ्तारियां

  • 20 अप्रैल 2011
सीबीआई
Image caption सीबीआई ने इन अधिकारियों को अंतरिम जमानत देने का विरोध किया था.

2-जी घोटाले में सुनवाई कर रही दिल्ली की एक विशेष अदालत ने अनिल अंबानी की कंपनी सहित चार अन्य कंपनियों के उच्च अधिकारियों को जेल भेज दिया है.

इन अधिकारीयों की अंतरिम ज़मानत याचिका को ख़ारिज करते हुए अदालत ने इन अधिकारियों को तिहाड़ जेल भेजने का रास्ता साफ़ कर दिया है.

दिल्ली में एक विशेष अदालत ने बुधवार को रिलायंस अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप के समूह प्रबंध संचालक गौतम दोषी, साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्षों सुरेंद्र पिपारा, हरी नायर, यूनिटेक लिमिटेड और यूनिटेक वायरलेस के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा, डीबी रियल्टी और स्वान टेलिकॉम के प्रबंध निदेशक विनोद गोयनका की याचिका निरस्त कर दी, जिसके बाद इन्हें हिरासत में ले लिया गया है.

लेकिन विशेष अदालत के फ़ैसले के बाद अब इन अधिकारियों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.

इन उच्च अधिकारियों के वकीलों का कहना है कि इन लोगों ने अब तक जांच में सहयोग किया है और इनके मुल्क छोड़ कर भागने की भी कोई संभावना नहीं है.

विरोध

इन पाँचों अधिकारियों के नाम सीबीआई ने 2-जी घोटाले की अपनी चार्जशीट में लिया था पर उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया था.

सीबीआई ने ज़मानत की याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि ये पाँचों रसूख़दार लोग हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं. पिछले शुक्रवार को सीबीआई के विशेष वकील यूयू ललित ने बहस के दौरान ये आशंका ज़ाहिर की थी कि ये लोग देश छोड़ कर भाग भी सकते हैं.

पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरिया, राजा के निजी सचिव आरके चंदोलिया और स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शहीद उस्मान बलवा पहले से 2-जी घोटाले में जेल में बंद हैं.

सीबीआई ने ए राजा और पूर्व सरकारी आला अधिकारियों और उद्योगपतियों पर ये आरोप लगाया है कि इन लोगों के कारण देश को 30 हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा का नुक़सान हुआ है.

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