रत्नागिरी से कर्फ्यू हटा

  • 20 अप्रैल 2011
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Image caption मछुआरों को भी अपनी संयंत्र से आजीविका प्रभावित होने का डर

महाराष्ट्र के जैतापुर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र के ख़िलाफ़ हो रहे आंदोलन के कारण क्षेत्र में अभी भी तनाव है. हालाँकि रत्नागिरी शहर में मंगलवार को लगाया गया कर्फ़्यू बुधवार सुबह हटा लिया गया है.

रत्नागिरी के ज़िला अधिकारी मधुकर गायकवाड ने बीबीसी को बताया है कि जिस व्यक्ति की सोमवार को पुलिस फ़ायरिंग में मृत्यु हो गई थी उसका शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया है.

मंगलवार को रत्नागिरी सिविल अस्पताल के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी जो मृतक व्यक्ति का शव लेने से इनकार कर रही थी. वहाँ झड़पें हुई थीं और साथ ही तोड़फोड़ भी हुई थी.

स्थानीय लोग जैतापुर में बनने वाले 9900 मेगावॉट परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध कर रहे हैं. इसे पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिल चुकी है और विरोध प्रदर्शन तब भड़के थे जब पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि उन्हें इस परियोजना से कोई आपत्ति नहीं है.

हाल में जापान में आए सूनामी और भूकंप की वजह से फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र की बुरी हालत के बाद भारत में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. भारत में इन संयंत्रों को लेकर बहस तेज़ हो गई है.

वहीं स्थानीय राजनीति भी ज़ोर पकड़ चुकी है. ग़ौरतलब है कि शिवसेना पार्टी के कार्यकर्ता भी जैतापुर आंदोलन में काफ़ी सक्रिय हैं.

फ़ायरिंग में हुई मृत्यु

महाराष्ट्र के रत्नागिरी शहर में जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र विरोधी आंदोलन की वजह से मंगलवार की दोपहर भारतीय समयानुसार करीब दो बजे कर्फ़्यू लगाया गया था.

जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र विरोधी आंदोलनकारी तबरेज़ सायेकर नामक एक व्यक्ति के शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने दे रहे थे. तबरेज़ की मृत्यु पुलिस की गोलीबारी में सोमवार को हुई थी.

तबरेज़ साकरीनाटे नाम के एक ऐसे गाँव का रहने वाला था जो मूलत: मछुआरों का गाँव है. जैतापुर संयंत्र के नज़दीक बसे इन गावों के मछुआरों को डर है कि जैतापुर में परमाणु संयंत्र बन जाने के बाद उनकी आजीविका प्रभावित होगी.

तबरेज़ की पुलिस गोलीबारी में मृत्यु के बाद आंदोलनकारी शव का पोस्ट मॉर्टम नहीं होने देना चाहते थे. न केवल वो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रहे थे बल्कि वो जैतापुर संयंत्र का काम भी रोके जाने की मांग कर रहे थे.

पुलिस जब शव को रत्नागिरी शहर पोस्ट मॉर्टम के लिए आई तो उसके पीछे आंदोलनकारी भी आ गए. राज्य में मुख्य विपक्षी दल शिवसेना ने रत्नागिरी ज़िले में बंद का आहवान किया. प्रशासन और लोगों में के बीच हिंसक टकराव को देखते हुए ज़िला अधिकारी ने कर्फ़्यू लगा दिया.

रत्नागिरी के कलेक्टर मधुकर गायकवाड़ ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "शव को मृतक के परिजनों को सौंप दिया गया और पूरे ज़िले में कहीं से किसी किस्म के टकराव की खबरें नहीं है. इसलिए फ़िलहाल कर्फ़्यू हटा लिया गया है."

तनाव

मंगलवार को लोग बड़ी संख्या में रत्नागिरी सिविल अस्पताल के बाहर जमा हो गए थे जहाँ मृत व्यक्ति की लाश रखी हुई थी. अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर अंगद चाटे ने बीबीसी को बताया था कि लोग पोस्टमॉर्टम रूम में घुस गए और अस्पताल के कर्मचारी को मारा.

उधर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शिवसेना पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि परमाणु उर्जा के अलावा कोई और चारा नहीं है.

शिवसेना नेता सुभाष देसाई ने घटना पर सदमें का इज़हार किया है और पुलिस कार्रवाई की निंदा की है.

लेकिन गृहमंत्री आरआर पाटिल ने कहा है कि पुलिस के पास गोली चलाने के अलावा और कोई चारा नहीं था क्योंकि लोग हिंसा पर उतर आए थे.

उनका कहना था, "हमें ये देखना होगा कि किन परिस्थितियों में पुलिस ने गोली चलाई. क़रीब 700 गाँववालों ने एक पुलिस स्टेशन को घेर लिया था जिसमें सिर्फ़ पाँच पुलिसवाले थे. उन्होंने थाने और गाड़ियों में आग लगा दी थी, और ये संभावना भी है कि कई हथियार भी ग़ायब हुए हैं."

सोमवार को रत्नागिरी के कलेक्टर मधुकर गायकवाड ने बीबीसी को बताया था कि आंदोलनकारियों के पथराव में क़रीब 50 पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं थीं.

स्थानीय लोग आशंकित

इससे पहले सोमवार सुबह माडबन गाँव के पास संयंत्र बनने वाली जगह पर शिवसेना ने विरोध प्रदर्शन किया था जिसका नेतृत्व पार्टी नेता राजन सालवी ने किया था. इसमें क़रीब 200 शिवसेना कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था. राजन सालवी पुलिस हिरासत में हैं.

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Image caption जैतापुर फ़्रांसीसी अरेवा और भारतीय एनपीसीआईएल का संयुक्त उपक्रम

23 अप्रैल से इस मुद्दे पर तारापुर परमाणु संयंत्र से जैतापुर तक मार्च की भी तैयारी है. ये मार्च 25 अप्रैल को जैतापुर में ख़त्म होगा और रास्ते में कई जगहों पर सभा होगी जिसमें परमाणु ऊर्जा से उत्पन्न ख़तरों के बारे में लोगों को बताया जाएगा.

मार्च के आयोजक राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा विरोधी यात्रा संयोजन में शामिल संस्था कोंकण विनाशकारी प्रकल्प विरोधी समिति के सत्यजीत चव्हाण ने बीबीसी को बताया कि संयंत्र के प्रस्ताव को निरस्त कर देना चाहिए क्योंकि वहाँ भूकंप की आशंका बहुत ज़्यादा है और पिछले 20 सालों में 90 भूकंप आ चुके हैं.

एशिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र प्रस्तावित

जैतापुर संयंत्र सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड, फ़्रांस की कंपनी अरेवा के सहयोग से बना रही है. कहा जा रहा है कि पूरा हो जाने पर ये एशिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र होगा.

लेकिन इस संयंत्र को लेकर कई शिकायतें भी हैं- परमाणु ऊर्जा बिजली पाने का एक ख़तरनाक तरीक़ा है, रेडियोधर्मी कूड़े को संभालकर रखने का तरीक़ा स्पष्ट नहीं है, यहाँ से पैदा बिजली महंगी होगी, फ्रेंच कंपनी अरेवा का सेफ़्टी रिकॉर्ड संदिग्ध है और इस संयंत्र से पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव पर तैयार की गई रिपोर्ट नाकाफ़ी है.

लेकिन पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील इस इलाक़े पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता है क्योंकि यहाँ जैतापुर परमाणु संयंत्र के अलावा कोयले से चलने वाले दूसरे संयंत्रों की भी योजना है.

आलोचकों का कहना है कि उन्हें चिंता इस बात की है कि विकास के होड़ में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के विचारों और भावनाओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.

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