इशरत मामले पर हाई कोर्ट सख़्त

इशरत जहाँ
Image caption इशरत वर्ष 2004 में पुलिस मुठभेड़ में मारी गई थी

गुजरात हाई कोर्ट ने इशरत जहाँ फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) बलवंत सिंह पर अवमानना का नोटिस जारी किया है.

हाई कोर्ट ने बलवंत सिंह से इशरत जहाँ मुठभेड़ मामले से जुड़े तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला करने को कहा था.

जस्टिस जंयत पटेल और अभिलाषा कुमारी की दो जजों की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि पिछली दो सुनवाई के बावजूद क्यों इन तीन पुलिस अधिकारियों का तबादला समय से नहीं किया गया.

हाई कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा, "बलवंत सिंह के ख़िलाफ़ अदालत के आदेश की अवमानना की प्रक्रिया क्यों न शुरू की जाए. "

हाई कोर्ट ने बलवंत सिंह को इस मामले में 11 मई तक जवाब देने को कहा है.

दरअसल हाई कोर्ट ने दो बार सरकार से कहा था कि वह आईपीएस अधिकारी पीपी पांड़ेय, जीएल सिंघल और तरूण बरोट का तबादला करे.

मुशिकल

वर्ष 2004 में हुए इशरत जहां मुठभेड़ मामले में इन तीन पुलिस अधिकारियों के शामिल होने का आरोप है.

हालांकि इन तीनों अधिकारियों का तबादला सुनवाई के एक दिन पहले बुधवार को किया गया.

कोर्ट ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुआई कर रहे आईपीएस अधिकारी करनैल सिंह को भी ज़िम्मेदारी से मुक्त कर दिया है.

करनैल सिंह ने कोर्ट से एसआईटी प्रमुख का पद छोड़ने की इच्छा जताई थी. इस समय वे मिज़ोरम में कार्यरत हैं.

अदालत ने कहा है कि पुलिस महानिरीक्षक सतीश वर्मा अब इस मामले की पूरी जांच करेंगे.

इतना ही नहीं वे ज़रूरत पड़ने पर गुजरात कैडर के किसी पुलिस उप महानिरीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के सभी आईपीएस अधिकारियों की मदद ले सकते हैं. इस स्थिति में गुतराज सरकार को उन अधिकारियों को सहयोग के लिए समय देना पड़ेगा.

हाई कोर्ट का कहना था कि गुजरात सरकार उसके आदेश को नहीं मान रही है और जांच में हस्तक्षेप कर रही है. अदालत ने सरकार को चेतावनी दी है कि जो भी जांच चल रही है उसमें दखलअदाज़ी न करे.

जाँच

माना जा रहा है कि हाई कोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद सतीश वर्मा किसी की भी गिरफ़्तारी कर सकते है.

अहमदाबाद में मौजूद स्थानीय पत्रकार अजय उमठ का कहना है ,"अब गुजरात सरकार के कई अफसर इस मामले में फंस सकते है. ये चार लोगो की हत्या का मामला है. ये भी साबित हो चुका है कि ये फर्ज़ी मुठभेड़ थी. ऐसे में सरकार अपना बचाव यही कह कर सकती है कि ये आंतकवादी थे. लेकिन अदालत ने कह दिया है कि इसकी जांच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ही करेगी कि ये लोग आंतकवादी थे या नहीं."

गुजरात हाई कोर्ट ने 2010 में इशरत जहाँ मुठभेड़ की जाँच सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष जाँच दल (एसआईटी) को सौंप दिया था.

2004 में मुंबई निवासी 18 वर्ष की कॉलेज छात्रा इशरत जहाँ और तीन अन्य लोग पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे. इशरत जहाँ की माँ शमीना कौसर ने इस मामले की सीबीआई जाँच कराने के लिए गुजरात हाई कोर्ट में अपील की थी.

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