'बंद हो सारे परमाणु ऊर्जा संयंत्र'

जैतापुर
Image caption जैतापुर के लोगों के प्रदर्शन में

महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले में जैतापुर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन देशभर में फैलते जा रहे हैं.

गुरूवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि देशभर में तमाम प्रस्तावित परमाणु संयंत्रों को निरस्त किया जाए.

आंदोलनकारियों की ओर से बोलते हुए प्रफुल्ल बिदवई ने कहा, "रत्नागिरी में किसी किस्म का कोई हमला पुलिस स्टेशन पर नहीं हुआ था. सरकार ने रत्नागिरी के मछुआरों और स्थानीय लोगों पर गोली केवल उन्हें धमकाने के लिए चलाई."

प्रफुल्ल बिदवई ने रत्नागिरी में शिवसेना की ओर से परमाणु पार्क विरोधी आंदोलन को अवसरवादिता बताया.

उन्होंने कहा, "शिव सेना ने एनरॉन के ज़माने में भी विपक्ष में रहते हुए उसका विरोध किया था बाद में सत्ता में आते ही उसने एनरॉन के पावर प्लांट को न केवल अनुमति दी बल्कि उसका आकार और बढ़ा दिया."

विवादित परियोजना

बिदवई ने आरोप लगाते हुए कहा, "भारत सरकार ने जैतापुर परमाणु संयंत्र का ठेका फ़्रांसीसी कंपनी अरेवा को केवल इसलिए दिया है क्योंकि फ़्रांस ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में भारत के मदद की थी. जिस तरह का संयंत्र यहाँ लगाने की योजना है उसे फ़्रांस तक में मंज़ूरी नहीं दी गई है."

महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले में लोग जैतापुर में बनने वाले 9900 मेगावॉट परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध कर रहे हैं. इसे पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिल चुकी है और विरोध प्रदर्शन तब भड़के थे जब पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि उन्हें इस परियोजना से कोई आपत्ति नहीं है.

हाल में जापान में आए सुनामी और भूकंप की वजह से फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र की बुरी हालत के बाद भारत में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं.

जैतापुर संयंत्र सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड, फ़्रांस की कंपनी अरेवा के सहयोग से बन रही है. कहा जा रहा है कि पूरा हो जाने पर ये एशिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र होगा.

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