अपार स्नेह का आभास नहीं था: निकी क्लार्क

  • 22 अप्रैल 2011
इमेज कॉपीरइट BBC World Service

जब मुझे पिछले हफ़्ते बीबीसी हिंदी सेवा के श्रोताओं की दो बैठकों में शामिल होने का निमंत्रण मिला तो मुझे कुछ-कुछ आभास था वहाँ कैसा माहौल होगा.

उदाहरण के तौर पर, मुझे पता था कि हमारे हिंदी बोलने-सुनने वाले श्रोता हाल के ब्रितानी सरकारी ख़र्चे पर हुए पुनर्विचार के बाद, शॉर्टवेव और मीडियम वेब पर रेडियो कार्यक्रमों के ब्रॉडकास्ट को बंद करने के फ़ैसले के बारे में बहुत चिंतित हैं.

मुझे ये लंदन और दिल्ली में हमें भेजे गए कई संदेशों, ई-मेल और फ़ोन कॉल्स के ज़रिए पता चला था.

बीबीसी हिंदी के लिए अपने सुझाव हमें भेजिए

मुझे ये भी पता था कि एक साल के लिए बीबीसी हिंदी के जिस नए रेडियो कार्यक्रम को चलाने की अनुमति दी गई है, इसमें श्रोताओं के विचारों का योगदान भी है. इस दौरान बीबीसी हिंदी रेडियो के लिए वैकल्पिक फ़ंडिग के व्यावसायिक स्रोत होंगे.

मुझे ये भी पता था कि बीबीसी हिंदी सेवा के श्रोता इस सेवा के भविष्य और उसके विकास के बारे में सक्रियता से जुड़े हुए हैं.

जोश

जो मुझे पूरी तरह से पता नहीं था, वह था बीबीसी हिंदी की टीम के काम के प्रति लोगों का अपार स्नेह (और मैं ये बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कह रही हूँ).

मुझे ये भी पूरी तरह से नहीं पता था कि लोग कितने जोश से बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के आधारभूत मूल्यों - संपादकीय स्वतंत्रता, ईमानदारी, निष्पक्षता - से जुड़े हुए हैं.

इसलिए यह लखनऊ और राय बरेली के सिंहपुर गांव में जमा हुए आप 500 लोगों के नाम एक धन्यवाद का संदेश भी है.

आप में से कई लोग गुजरात और बिहार के दूरदराज़ के इलाक़ों से आए थे और आपने दृढ़ विश्वास से बताया कि बीबीसी हिंदी सेवा आपके लिए क्या मायने रखती है और इसने आपकी ज़िंदगी में कितनी अहम भूमिका निभाई है.

शुक्रिया

जो लोग हमें 60 साल से सुन रहे हैं और जो हाल-फ़िलहाल में इंटरनेट के ज़रिए हमारे काम को देख रहे हैं, मैं उन सभी का धन्यवाद करती हूँ.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption बीबीसी के श्रोता बड़ी संख्या में आए

जो लोग दूरदराज़ से लंबा सफ़र तय कर अपनी बात रखने आए थे, मैं उम्मीद करती हूँ कि महसूस कर रहे होंगे कि आपको अपनी बात रखने का मौक़ा मिला.

मेहमान नवाज़ी और कार्यक्रम संबंधी सुझावों के लिए मैं सिंहपुर के सभी लोगों की आभारी हूँ. नए कार्यक्रम दोबारा चलाए जाने वाली ख़बरों के बारे में मैं आपकी चिंता समझ सकती हूँ. हम विचार करेंगे कि इस एक घंटे में हम आप तक किस तरह से ज़्यादा से ज़्यादा नई ख़बरें पहुँचा सकते हैं.

जहाँ तक सुबह के कार्यक्रमों और रेडियो सेवा को ज़ारी रखने के अनुरोध हैं, तो ये बीबीसी के इस साल के बाद आगे फ़ंडिग जुटा पाने पर निर्भर करेगा.

मैं कोई वादा तो नहीं कर सकती, न ही कोई गारंटी दे सकती हूँ लेकिन ये ज़रूर कह सकती हूँ कि हम फंडिंग जुटाने के सभी विकल्प खोजने के प्रयास करेंगे. हम इस संदर्भ में सभी गतिविधियों के बारे में आपको बताते रहेंगे और साथ ही 'दिन भर' में यदि कोई बदलाव होते हैं तो उनके बारे में बताएँगे.

संबंधित समाचार