जस्टिस संतोष हेगड़े इस्तीफ़ा नहीं देंगे

संतोष हेगड़े
Image caption संतोष हेगड़े कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बयान से आहत हुए थे.

कर्नाटक के लोकायुक्त और लोकपाल पर बनी ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य जस्टिस संतोष हेगड़े कमेटी से इस्तीफ़ा नहीं देंगे.

शनिवार को दिल्ली में नागरिक समाज के सदस्यों की एक बैठक के बाद ये फ़ैसला किया गया.

पूर्व पुलिस अधिकारी किरण बेदी और अन्ना हज़ारे की एक सहयोगी किरण बेदी ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी दी.

किरण बेदी ने कहा कि अन्ना हज़ारे की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें लोकपाल ड्राफ़्टिंग कमेटी में नागरिक समाज के पांच प्रतिनिधियों के अलावा स्वंय वो और स्वामी अग्निवेश मौजूद थे.

किरण बेदी ने कहा कि बैठक के दौरान सर्वसम्मति से ये फ़ैसला किया गया कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्देश्य एक सशक्त और निष्पक्ष लोकपाल के लिए मसौदा तैयार करना है लिहाज़ा जस्टिस संतोष हेगड़े इस्तीफ़ा नहीं देंगे और इस मक़सद में वो पूरे ज़ोर शोर से अपना सहयोग देंगे.

किरण बेदी के साथ अरविंद केजरीवाल ने भी पत्रकारों को संबोधित किया. केजरीवाल ने बताया कि वे लोग सोमवार को प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधिश को ख़त लिखकर उन दोनों से अनुरोध करेंगे कि नागरिक समाज के किसी भी प्रतिनिधि के बारे में अगर कोई भी शिकायत है तो उसकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए.

केजरीवाल ने ये भी बताया कि जो भी बयानबाज़ी या आरोप लग रहें हैं उन पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है.

इससे पहले शनिवार सुबह को जस्टिस हेगड़े ने कहा था कि उनके इस पद से इस्तीफ़ा देने या न देने पर अंतिम फ़ैसला अन्ना हज़ारे का होगा.

शानिवार को बंगलौर से राजधानी दिल्ली पहुँचने पर संतोष हेगड़े ने पत्रकारों से कहा, "मैं अन्ना हज़ारे के फ़ैसले को मानूंगा. निजी तौर पर मुझे लगा था कि मुझे इस्तीफ़ा दे देना चाहिए पर दिल्ली में लोगों से बात करने के बाद मैंने अपना मन बदला है."

हाल ही में कांग्रेस पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह ने जस्टिस संतोष हेगड़े पर कर्नाटक में भ्रष्टाचार रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था.

दिग्विजय सिंह ने ये भी आरोप लगाया था कि हेगड़े कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा के कथित भ्रष्टाचार को नज़रंदाज़ कर रहे हैं.

इन्हीं आरोपों के बाद जस्टिस संतोष हेगड़े ने जन लोकपाल ड्राफ्टिंग कमेटी से इस्तीफ़ा देने की बात कही थी.

मायावती की मांग

इससे पहले शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने लोकपाल बिल कमेटी में दलित प्रतिनिधि को शामिल न किए जाने पर केंद्र सरकार और नागरिक समाज पर निशाना साधा था.

मायावती ने कमेटी को नए सिरे से बनाने और इसमें दलित वर्ग के सदस्य को शामिल किए जाने की मांग भी की थी.

मायावती के बयान के बाद दिग्विजय सिंह ने भी कमेटी में दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व की बात कही है.

जस्टिस संतोष हेगड़े ने मायावती की इस मांग पर कहा ,"ऐसा कोई विवाद है ही नहीं. कुछ लोग इस प्रक्रिया को नुक़सान पहुंचाना चाहते हैं. अगर पांच सदस्यों की कमेटी में आप जाति के आधार पर प्रतिनिधित्व करने लगेंगे तो कमेटी कभी गठित ही नहीं की जा सकेगी."

उधर केंद्रीय मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने लोकपाल कमेटी के सदस्यों में किसी भी बदलाव की बात से इनकार किया है और कहा है कि नए क़ानून पर सरकार जस्टिस हेगड़े के विचारों का इंतज़ार कर रही है.

सलमान ख़ुर्शीद ने कहा कि वे निजी तौर पर जस्टिस हेगड़े की बहुत इज्ज़त करते हैं और उनके सहयोग की कामना भी करते हैं.

केंद्र सरकार ने जन लोकपाल कमेटी का मसौदा तैयार करने के लिए जिस 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है उसमे सलमान ख़ुर्शीद भी शामिल हैं.

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