पीएसी बैठक में बवाल, रिपोर्ट अटकी

मुरली मनोहर जोशी
Image caption मुरली मनोहर जोशी वाली इस समिति का कार्यकाल 30 अप्रेल को समाप्त हो रहा है

संसद में मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली लोक लेखा समिति ने जबसे 2 जी घोटाले की जांच शुरू की है तब से राजनीतिक हंगामा मचा हुआ है लेकिन गुरूवार का हंगामा सारे पिछले हंगामों पर भारी था.

गुरूवार को समिति की बैठक में हंगामा हुआ, नारे लगे और मुरली मनोहर जोशी बैठक छोड़ कर बाहर आ गए.

आम तौर पर राजनीतिज्ञों से भरी ये समिति अराजनीतिक रहती है और इसके सदस्य मोटा-मोटी मिलजुल कर निर्णय लेते हैं और एक दूसरे के ख़िलाफ़ खुल कर नहीं बोलते. लेकिन इस बार मामला ज़्यादा ही उलझ गया. भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद और इस समिति के एक सदस्य कलराज मिश्र ने बीबीसी को बताया, " सुबह 11 बजे जब समिति बैठक के लिए जमा हुई तो कांग्रेस के सदस्यों ने मुरली मनोहर जोशी पर इस रिपोर्ट को लीक करने का आरोप लगाया.

मुरली मनोहर जोशी ने भोजन के अवकाश के बाद चार बजे अपनी बात कहने का मन बनाया. लेकिन कांग्रेसी सदस्यों ने हंगामा खड़ा कर दिया कहा कि वोटिंग कराओ. जोशी जी को बोलने नहीं दिया गया.

कलराज मिश्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेसी सांसदों की इस रिपोर्ट पर चर्चा करने की नीयत ही नहीं थी.

'इतनी जल्दबाजी क्यों'

लोक लेखा समिति में समाजवादी पार्टी के लोक सभा सांसद रेवती रमण सिंह ने भी रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. उनका ये भी आरोप था कि रिपोर्ट पढ़ने के लिए उन्हें बहुत ही कम समय दिया गया है.

रेवती रमण सिंह ने बीबीसी से कहा, "कल मुझे 270 पन्नों की रिपोर्ट मिली और आज मुझे उसके साथ जुड़े दस्तावेज़ मिले. में कब पढता? जनता में संदेश जाता कि रिपोर्ट जल्दबाज़ी में पास करा ली."

बैठक से मुरली मनोहर जोशी के बाहर जाने के बाद कांग्रेसी सदस्यों ने सैफुद्दीन सोज़ की अध्यक्षता में बैठक की और रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया. रेवती रमण सिंह इस कदम को महज़ राजनीतिक शिगूफ़ा मानते हैं.

रेवती रमण सिंह ने कहा, "जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण था. जो कांग्रेसी सांसदों ने किया वो भी नहीं होना था और न जोशी जी को इस तरह से व्यवहार करना था."

इस समिति के सदस्य और कांग्रेस नेता केएस राव ने पहले ही रिपोर्ट लीक होने के लिए मुरली मनोहर जोशी को ज़िम्मेदार ठहराया था और उनके त्यागपत्र की भी मांग कर दी थी.

आलोचना

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ इस लीक रिपोर्ट में 2-जी स्पैक्ट्रम घोटाले के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी कई सवाल उठाए गए हैं.

ये भी कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट में वित्त मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल की भी आलोचना की गई है.

इसी लीक रिपोर्ट को लेकर सत्ताधारी गठबंधन के कई सदस्य बैठक से पहले ही मुरली मनोहर जोशी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल चुके थे.

मौजूदा समिति का कार्यकाल शनिवार को ख़त्म हो रहा है और माना जा रहा था कि मुरली मनोहर जोशी अपनी रिपोर्ट को पास कराने की भरपूर कोशिश करेंगे.

2-जी स्पैक्ट्रम मामले में ही पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा की गिरफ़्तारी हुई है और वे जेल में है.

संबंधित समाचार