'कोई वसीयत नहीं छोड़ी, काम जारी रहेगा'

  • 28 अप्रैल 2011
सत्य साईंबाबा को श्रृद्धांजलि इमेज कॉपीरइट AFP

गुरूवार को सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट के सदस्यों ने घोषणा की कि बाबा ने अपने पीछे ना तो कोई वसीयत छोड़ी है और न ही किसी को अपना उत्तराधिकारी बनाया है.

ट्रस्ट ने स्पष्ट कर दिया है की बाबा के निजी सहायक सत्यजित केवल ट्रस्ट के एक कर्मचारी है और उन्हें ट्रस्ट में लेने या उन्हें बाबा का उत्तराधिकारी बनाने का कोई इरादा नहीं है.

इस तरह मीडिया में चल रही इन अटकलों को ट्रस्ट ने रद्द कर दिय है कि बाबा सत्यजित को ट्रस्ट में शामिल करना चाहते थे या उन्हें बाबा की जगह ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया जाएगा.

समाचार साधनों में उठने वाले कई विवादों और सवालों के घेरे में आए ट्रस्ट के सदस्यों ने ये स्पष्ट कर दिया है की साईं बाबा के अपने नाम पर कोई संपत्ति नहीं थी और जो कुछ भी उन्होंने पीछे छोड़ा है वो सब कुछ ट्रस्ट के नाम पर ही है.

सत्यजीत महज़ एक निजी सहायक

ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा है कि अभी ट्रस्ट के अध्यक्ष पद के विषय में कोई फ़ैसला नहीं किया गया है.

इस प्रेसवार्ता में ट्रस्ट के जो सदस्य उपस्थित थे उनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश पीएन भगवती, उद्योगपति वी श्रीनिवासन, पूर्व सीवीसी एसवी गिरी, इन्दुलाल शाह, नगनान्दा और बाबा के भतीजे आरजे रत्नाकर शामिल थे.

ट्रस्ट के सचिव चक्रवर्ती ट्रस्ट का सदस्य ना होने की वजह से प्रेसवार्ता में मौजूद नहीं थे.

पत्रकार सम्मलेन में अधिकतर वी श्रीनिवासन ही बोले.

उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्यजीत की इससे ज़्यादा कोई हैसियत नहीं है कि बाबा ने उन्हें अपनी निजी सेवा के लिए चुना था और वो सत्य साईं विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र हैं.

बाबा के भतीजे रत्नाकर ने कहा की उनका सत्यजीत के साथ कोई मतभेद नहीं हैं और दोनों के अच्छे संबंध हैं. उन्होंने इन ख़बरों का खंडन भी किया अस्पताल में भर्ती बाबा से उनके परिवार के सदस्यों को मिलने नहीं दिया गया.

चैक पर कौन हस्ताक्षर करेगा?

बाबा के देहांत के बाद से ये सवाल सब की ज़ुबान पर है की बाबा की जगह अब ट्रस्ट के चेक पर हस्ताक्षर कौन करेगा? इस पर रत्नाकर ने कहा की अब तक यह अधिकार केवल बाबा के पास ही था और आगे के प्रबंध के बारे में ट्रस्ट अपनी अगली बैठक में कोई फ़ैसला करेगा.

ट्रस्ट ने मीडिया में लगाए जाने वाले इन आरोपों का खंडन किया कि ट्रस्ट में अनियमितताएं हो रही हैं.

विशेषकर उन रिपोर्टों पर सदस्यों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की जिनमें ये कहा जा रहा था कि बाबा के देहांत से बहुत पहले ही यानी पांच अप्रैल को ही बाबा के लिए एक ताबूत का आर्डर दे दिया गया था.

श्रीनिवासन ने कहा कि ट्रस्ट ने ऐसा कोई ऑर्डर नहीं दिया था, हो सकता है की किसी भक्त ने अपनी तरफ़ से ऐसा कोई ऑर्डर दिया हो.

नागानंद ने कहा की गलत आरोप लगाने वाले एक समाचार पत्र के विरुद्ध कानूनी करवाई शुरू कर दी गई है.

संपत्ति का ब्यौरा

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption ट्रस्ट के सदस्यों के अनुसार सत्यजीत साईंबाबा के सिर्फ़ निजी सहयोगी थे.

ट्रस्ट ने अपने अंतर्गत आने वाली संपत्ति के ब्यौरा भी जारी किया लेकिन उन्होंने इस संपत्ति के मूल्य का कोई आंकड़ा नहीं दिया. समाचार माध्यमों में ये अनुमान लगाए जा रहे थे की यह संपत्ति 40 हज़ार करोड़ रुपये से डेढ़ लाख करोड़ के बीच हो सकती है.

नगनान्दा ने कहा की इस संपत्ति के मालियत का अनुमान लगाना मुश्किल है. उन्होंने केवल इतना कहा की ट्रस्ट में एक एक पाई का हिसाब रखा जाता है और सारे खातों की आडिटिंग के बाद उसे सरकार को भी पेश किया जाता है.

ट्रस्ट 1971 में स्थापित की गई थी. बाबा ने इसका गठन गरीबों को मुफ्त चिकित्सा और उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए किया था.

ट्रस्ट ने 1995 में पीने के पानी की आपूर्ति की एक बहुत बड़ी परियोजना शुरू की जिस को अनंतपुर, मेडक, महबूबनगर, पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिलों में लागू किया गया और इसपर गत वर्ष तक 500 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए.

ट्रस्ट के अंतर्गत पुट्टापर्ति और बंगलौर में बड़े अस्पताल बनाए गए हैं और अब कर्नाटक के चिकमकलूर में भी ऐसा ही एक अस्पताल बनाए की योजना है.

सेंट्रल ट्रस्ट का वार्षिक खर्च 75 से 100 करोड़ रुपए के बीच है.

हैदराबाद में पचीस एकड़ पर सत्य साईं निगम स्थित है. इसके अलावा वर्ष 1991 में पुट्टापर्ति में 150 एकड़ भूमि पर ट्रस्ट ने एक हवाई अड्डे का निर्माण किया था.

पुट्टापर्ति में प्रशांति निलयम आश्रम 75 एकड़ पर बनाया गया है. ट्रस्ट के पास तमिलनाडू में कोडइकनाल और कुछ अन्य स्थानों पर भी ज़मीन है.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार