जल माफ़िया, जन संघर्ष और जीत...

  • 30 अप्रैल 2011
Image caption बीबीसी के लिए सिटीज़न रिपोर्टर बने ब्रजेश कुमार चौहान.

पानी आदमी की बुनियादी ज़रूरत है लेकिन भारत में आज भी कई इलाके ऐसे हैं जहां सरकार की ओर से पानी की कोई सुविधा नहीं. ऐसे में लोगों की ज़रूरत और सरकार की नाकामी का फ़ायदा उठाते हैं कुछ मुठ्ठीभर लोग जिन्हें ‘जल माफ़िया’ के नाम से जाना जाता है.

क्या है ये जल माफ़िया और आम आदमी का पानी के लिए संघर्ष बता रहे हैं सिटीज़न रिपोर्टर ब्रजेश कुमार चौहान.

'' मेरा नाम ब्रजेश कुमार चौहान है और मैं दिल्ली के संगमविहार इलाके में रहता हूं. अपनी इस रिपोर्ट के ज़रिए आपको बताना चाहता हूं कि अपने इलाके को पानी मुहैया कराने के लिए कैसे मैंने औक मेरे इलाके के लोगों ने आठ साल लंबी एक लड़ाई लड़ी.

दिल्ली की 30 फ़ीसदी से ज़्यादा आबादी झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहती है जहां पानी की कोई सप्लाई नहीं. 4 लाख से भी ज्यादा आबादी वाला ऐसा ही एक इलाका है संगम विहार.

जल माफिया का कब्ज़ा

हमारे इलाके में जब पानी की किल्ल्त बढ़ती गई तो इलाके के एक शख्स ने सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए एक ट्यूबवैल लगाने की बात ट्यूबवैल के लिए हर घर से एक हजार रुपए लिए गए लेकिन कोई नहीं जानता था कि सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए लगाए जा रहे ट्यूबवैल पर जल माफिया का कब्जा होगा.

संगमविहार में रहने वाले धर्मेंदर सिंह यादव कहते हैं, ''पानी की सप्लाई के लिए हर महीने जल माफ़िया हमसे पैसे वसूलने लगा. पानी की सप्लाई 18 से 20 दिन में एक बार होती थी. पानी भर कर रखने के कारण उसमें कीड़े पड़ने लगते थे. गर्मियों में पानी की कमी इतनी बढ़ जाती थी कि कीड़े वाले इस पानी को छान कर पीने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं था.''

जल माफिया के कब्ज़े और इस धांधली के सबूत जुटाने के लिए हम लोगों ने वीडियो रिकार्डिंग की. हर कीमत पर हम प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाना चाहते थे. लेकिन इस दौरान हम पर जानलेवा हमले हुए और हमें धमकियां दी गईं.

कहीं सुनवाई न होने पर हमने आखिरकार जन शिकायत आयोग का सहारा लिया और आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष मीनाक्षी दत्ता घोष से मिले.

आठ साल का संघर्ष

मीनाक्षी दत्ता घोष कहती हैं, '' इन लोगों ने आयोग से शिकायत की कि इनके इलाके में पानी नहीं है और पानी बेचा जा रहा है. ऐसे में हमने जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस को तलब किया. 18 सुनवाई के बाद जल बोर्ड ने माना कि इलाके में जल माफ़िया सक्रीय और लोगों को पानी नहीं मिल रहा. इसके बाद हमने आम लोगों के लिए बोरवैल लगाया और आखिरकार उन्हें पानी मिला.''

पानी के लिए हमारा ये संघर्ष आठ साल तक चला और आखिरकार हम कामयाब हुए. आज हमारे घरों में पानी है और हम किसी के मोहताज नहीं.

अनाधिकृत कॉलोनियां पानी की सप्लाई के लिए पूरी तरह निजी ट्यूबवैलों और जल बोर्ड के टैंकरों पर निर्भर हैं. ऐसे में जल माफिया पर अगर लगाम न कसी गई तो इन कॉलोनियां में रहने वालों की जिंदगी मुश्किल होती जाएगी.

आम आदमी अगर अपने अधिकारों के लिए लड़ने की ठान ले तो प्रशासन को ईमानदारी से काम करने पर मजबूर कर सकता है.''

अगर आप भी अपने अधिकारों को पाने और व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो parul.agrawal@bbc.co.uk पर हमसे संपर्क करें. मुमकिन है आपकी कहानी भी दूसरों के लिए बदलाव की मिसाल बन जाए.

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