उड़ीसा में सात लोगों को ज़िंदा जलाया

बालंगीर ज़िला (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption कुछ दिनों पहले उड़ीसा के ही बालंगीर ज़िले में भीड़ ने एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को ज़िंदा जला दिया था.

भारत के पूर्वी राज्य उड़ीसा में भीड़ ने एक महिला समेत सात लोगों को ज़िंदा जला दिया. पुलिस के मुताबिक़ ये घटना गंजम ज़िले के बाडागाडा गांव में शुक्रवार को शाम नौ बजे के क़रीब घटी. घटनास्थल राज्य की राजधानी भुवनेश्वर से क़रीब 250 किलोमीटर दूर है.

राज्य के दक्षिणी रेंज के डीआईजी आर के शर्मा के अनुसार बुरी तरह से जली हुई छह लाशें एक कमरे से मिलीं जबकि एक और शव उसी परिसर में पड़ा हुआ पाया गया.

लाशें इस क़दर जल गई थीं कि उनको पहचाना नहीं जा सकता था.

विवाद

पुलिस ने बताया कि विवाद का मुख्य कारण गांव में कुछ महीने पहले लगाया गया पत्थर तोड़ने का संयंत्र है जिसका कुछ गांव वाले विरोध कर रहे हैं.

पुलिस के अनुसार स्थानीय लोग अपने गांव में कंक्रीट बनाने वाले इस संयंत्र का विरोध कर रहे थे, क्योंकि उनके अनुसार इससे प्रदूषण फैल रहा था और गांव को घरों को भी नुक़सान पहुंच रहा था.

स्थानीय पुलिस अधिकारी बिनोद कामिला का कहना है कि कुछ दिनों पहले गांव वालों ने देखा कि स्थानीय मंदिर की दीवारों में कुछ दरारें पड़ गई हैं. गांव वालों के अनुसार पत्थर तोड़ने के संयंत्र के ज़रिए लगातार विस्फोट किए जाने के कारण ही मंदिर की दीवारों में दरारें पड़ी हैं.

उन्होंने मालिकों से मंदिर की मरम्मत के लिए पैसे मांगे लेकिन कथित तौर पर मालिकों ने पैसे देने से इनकार कर दिया और गांव वालों को सबक़ सिखाने के लिए गुंड़ों का इस्तेमाल किया.

शुक्रवार शाम हालात उस वक़्त बेक़ाबू हो गए जब सैकड़ों हथियार बंद गांव वालों ने मिलकर संयंत्र पर हमला कर दिया. संयंत्र के लोग डरकर भागने लगे और जान बचाने के लिए एक कमरे में जाकर छुप गए.

भीड़ ने कमरे में आग लगा दी जिसमें सात लोग मारे गए. मारे जाने वालों में संयंत्र के तीन मालिक और तीन कर्मचारी शामिल हैं.

आरोप

ऐसी भी ख़बरें हैं कि स्थानीय पुलिस और फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ियों को कई घंटों तक घटना स्थल पर पहुंचने से रोका गया और जब आधी रात को पुलिस वहां पहुंची तब तक सब कुछ समाप्त हो गया था. घटना स्थल के पास से विस्फोट की भी आवाज़ें आ रहीं थीं जो काफ़ी दूर से सुनी जा सकती थीं.

मृतकों के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस ने पीड़ितों को बचाने की कोई कोशिश नहीं की. उन्होंने कहा, ''हमलोग स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लगातार फ़ोन करते रहे लेकिन वो ये कहते रहे कि उनके पास इतनी संख्या में पुलिसकर्मी नहीं हैं कि वो दंगाइयों का मुक़ाबला कर सकें. उनका कहना था कि पर्याप्त पुलिस बल आने के बाद ही वे घटना स्थल पर जाएंगे.''

किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए लगभग 200 पुलिसकर्मी घटना स्थल पर भेज दिए गए हैं. ख़बरों के मुताबिक़ ज़्यादातर पुरूष गांव छोड़कर भाग गए हैं.

राज्य गृह विभाग ने ज़िला प्रशासन से मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है.

राज्य पुलिस प्रमुख अनूप पटनायक ने कहा कि जांच के लिए एक दल नियुक्त कर दिया गया है.

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