इतिहास के पन्नों से

  • 3 मई 2011
श्रीलंका विमान इमेज कॉपीरइट bbc
Image caption 1986 में हुए इस विमान बम हमले में 21 लोग मारे गए थे

इतिहास में आज का दिन कई कारणों से महत्वपूर्ण है.

श्रीलंका बम हमला

आज ही के दिन वर्ष 1986 में श्रीलंका के कोलंबो हवाई अड्डे पर एक विमान में हुए बम विस्फोट में 21 लोग मारे गए थे और 41 लोग घायल हुए थे.

एयर लंका थ्रीस्टार के विमान यूएल 512 में हादसे के समय 128 यात्री सवार थे.

इस हवाई जहाज़ में 25 ब्रितानी नागरिक थे जिसमें से पाँच घायल हो गए थे.

ये माना गया था कि ये बम तमिल विद्रोहियों ने लगाया था जो अलग राष्ट्र की मांग कर रहे थे.

ये विमान लंदन के गैटविक हवाई अड्डे से ज़्यूरिख और दुबई होते हुए श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंचा था.

इस विमान में मुख्यत: फ्रांस, ब्रिटेन और जापान के पर्यटक सवार थे जो मालदीव द्वीप के लिए उड़ान भरने ही वाले थे कि ये विस्फोट हुआ, जिसने हवाई जहाज़ को दो हिस्सों में तोड़ दिया

ब्रिटेन में पहला हृदय प्रतिरोपण

Image caption ब्रिटेन में 18 डॉक्टरों और नर्सों की टीम ने पहला हृदय प्रतिरोपण करने में सात से ज्यादा घटें लिए थे

आज ही के दिन साल 1968 में ब्रिटेन में पहला ह्रदय ट्रांसप्लांट हुआ.

लंदन के नेशनल हॉर्ट हॉस्पिटल में 18 डॉक्टरों और नर्सों की एक टीम ने पहला सफल हृदय प्रतिरोपण एक 45 वर्षीय पुरूष पर किया..

इस ऑपरेशन का नेतृत्व दक्षिण अफ्रीका में पैदा हुए एक सर्जन डोनल्ड रॉस ने किया और इस ऑपरेशन में सात घंटे से ज्यादा समय लगा.

हालांकि जिस मरीज़ का प्रतिरोपण किया गया उसका नाम नहीं बताया गया लेकिन इस व्यक्ति को अपना हृदय दान करने वाले 26 वर्षीय मज़दूर पैट्रिक रायन थे.

रायन का हृदय उनकी मौत के तुरंत बाद निकाला गया था.

लातविया स्वतंत्र राष्ट्र

1990 में आज ही के दिन ये ख़बर आ रही थी की लातविया सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता घोषित करेगा.

इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए लातविया के नई संसद के सदस्यों ने मुलाकात की थी.

लात्वियन पॉपुलर फ्रंट के नेता इस बात को लेकर काफी़ आश्वस्त थे कि उन्हें संविधान बदलने के लिए बहुमत मिल जाएगा.

इसी साल मार्च के महीने में पड़ोसी देश लिथुआनिया सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला राष्ट्र बना था.इसके विरोध में क्रेमलिन ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई रोक दी थी.

हालांकि लातविया ये उम्मीद कर रहा था कि उसे सोवियत संघ से ऐसी परिस्थितियां न झेलनी पड़े. इसके लिए उसने सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाच्यौफ़ के सामने पूर्ण स्वतंत्रता से पहले थोड़ा समय देने की बात कही थी.

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