आतंक अब बिन लादेन

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Image caption भारतीय समाचार पत्रों में लादेन की मौत के असर का भी ज़िक्र है

भारतीय समाचार पत्र अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की ख़बरों से भरे पड़े हैं. हर समाचार पत्र ने इसे अपनी पहली ख़बर बनाया है.

अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों अख़बारों ने इस ख़बर के अलावा पाकिस्तान पर इसके प्रभाव, आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध पर इसका असर और अमरीका की भूमिका का भी विश्लेषण किया है.

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स का शीर्षक है- यूएस किल्स ओसामा इन पाकिस्तान. यानी अमरीका ने ओसामा को पाकिस्तान में मारा. अख़बार का कहना है कि अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के पास हवाई हमला या ज़मीनी कार्रवाई करने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने हवाई हमला करने को मंज़ूरी दी.

अख़बार का कहना है कि ओसामा बिन लादेन का शव समुद्र में डाल दिया गया है और डीएनए टेस्ट से इसकी पुष्टि हो चुकी है कि मारा गया शख़्स ओसामा बिन लादेन ही था.

इंडियन एक्सप्रेस ने अमरीका में चल रहे जश्न की बड़ी सी तस्वीर छापी है और शीर्षक लगाया है- ओसामा इज़ डेड. यानी ओसामा बिन लादेन की मौत.

अख़बार ने ये भी बताया है कि अमरीकी सैनिकों को कैसे ओसामा बिन लादेन का पता चला और 10 महीने पहले मिले सुराग़ पर काम करके आख़िरकार वे लादेन तक पहुँच ही गए.

पाकिस्तान पर सवाल

अख़बार ने भारत के उस बयान को भी प्रमुखता दी है, जिसमें भारत ने कहा है कि पाकिस्तान पर वो सही साबित हुआ है.

हिंदी अख़बार जनसत्ता का शीर्षक है- अल क़ायदा हुआ बिन लादेन. अख़बार का कहना है कि पाकिस्तान के ऐबटाबाद में सैन्य एकेडमी की नाक के नीचे छिपा था आतंकवाद का प्रमुख.

अख़बार का कहना है कि ऐबटाबाद की आलीशान इमारत पर कैसे अमरीकी अधिकारियों का शक़ दिनों-दिन बढ़ता गया. अख़बार का ये भी दावा है कि ओसामा के वफ़ादार अंगरक्षकों ने अमरीकी हेलिकॉप्टरों पर गोलीबारी की.

अपने संपादकीय में जनसत्ता ने सवाल उठाया है कि ओसामा के मारे जाने के बाद क्या होगा. अख़बार का कहना है कि यह एक बड़ी सफलता ज़रूर है लेकिन आतंकवाद का अंत नहीं.

अंग्रेज़ी अख़बार पॉयनियर लिखता है कि फ़ाइनली ओबामा गेट्स ओसामा यानी आख़िरकार ओबामा को ओसामा मिल ही गए. अख़बार ने पाकिस्तान की भूमिका के बारे में लिखा है कि उसे इस कार्रवाई के बारे में अंधेरे में रखा गया.

अख़बार का कहना है कि अमरीका ने इसकी योजना बनाई और अकेले ही इस कार्रवाई को अंजाम दिया. अख़बार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान को भी पहले पन्ने पर जगह दी है और कहा है कि संयत प्रधानमंत्री ने पीओके (पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर) के कैंपों का ज़िक्र नहीं किया.

भारत में है कितना दम

अख़बार ने इस पर भी एक लेख छापा है कि क्या भारत अमरीका जैसी कार्रवाई कर सकता है? अख़बार का कहना है कि भारत 26/11 के जिहादियों पर कार्रवाई करने में विफल रहा.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया का शीर्षक है- यूएस किल्स ओसामा, ब्लोज़ पाक कवर. यानी अमरीका ने ओसामा को मारा और 'पाकिस्तानी परदे' की धज्जियाँ उड़ाई.

अख़बार का कहना है कि पाकिस्तान जिस तरह अपने यहाँ से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों पर परदा डालता रहा है, उसकी आज धज्जियाँ उड़ गई है.

अख़बार लिखता है कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के सैनिक शहर में राजधानी इस्लामाबाद से 60 किलोमीटर दूर और भारत से 100 किलोमीटर की दूरी पर रह रहा था.

पाकिस्तान को झूठा बताते हुए अख़बार ने लिखा है कि पाकिस्तान के इनकार के बावजूद आख़िरकार ओसामा पाकिस्तान में ही मिला.

चालीस मिनट

अख़बार ने पहले पन्ने में कई सवाल भी उठाए हैं, क्या पाकिस्तान इस अभियान में शामिल था, क्या पाकिस्तान ये जानता था कि ओसामा कहाँ छिपे हैं, ओसामा के मारे जाने का सबूत कहाँ है और कार्रवाई के दौरान अमरीका का एक हेलिकॉप्टर कैसे दुर्घटनाग्रस्त हुआ.

द हिंदू का कहना है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए ये बहुत बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है. अख़बार शीर्षक है- यूएस फ़ोर्सेस किल ओसामा बिन लादेन यानी अमरीकी सैनिकों ने ओसामा बिन लादेन को मारा.

हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर ने ओसामा की तस्वीर के साथ इस ख़बर को छापा है. शीर्षक है- आतंक अब बिन लादेन. अख़बार का कहना है कि लादेन पाकिस्तान में ही पनाह लिए हुए था. अख़बार ने हमले की रणनीति का क्रमवार ब्यौरा भी दिया है.

दैनिक हिंदुस्तान का शीर्षक है- हज़ारों के हत्यारे का अंत, तो अमर उजाला का कहना है कि सबसे खूँखार आतंकवादी का अंत हो गया है. अख़बार ने ओबामा के उस बयान को भी अहमियत दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लाम से कोई झगड़ा नहीं है.

अमर उजाला ने लादेन से मिल चुके पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर से बातचीत के आधार पर एक लेख भी छापा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि लादेन को अमरीकी ताक़त का बख़ूबी अहसास था.

इस लेख में हामिद मीर ने दावा किया है कि लादेन ने यह कहा था- मुझे मार सकते हो, ज़िंदा नहीं पकड़ सकते.

हिंदी अख़बार दैनिक जागरण ने लिखा है कि चालीस मिनट के अभियान में मारा गया ओसामा. अख़बार ने शीर्षक लगाया है- आतंक का अंत.

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