'पायलट समिति की रिपोर्ट का इंतज़ार करें'

Image caption एयर इंडिया ने पायलटों से उनकी 'गैरकानूनी हड़ताल' बिना किसी शर्त के फौरन वापस लेने की मांग दोहराई है.

हड़ताल कर रहे एयर इंडिया पायलटों के साथ अनौपचारिक बातचीत के दूसरे दिन, एयर इंडिया ने कहा है कि वो पायलटों की वेतन बढ़ोत्तरी की मांग से सहमत हैं लेकिन उनके तरीके से नहीं.

एयर इंडिया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है, “पायलटों को तुरंत काम पर लौटना होगा और ये भरोसा दिलाना होगा कि जस्टिस धर्माधिकारी समिति की सिफारिशें लागू किए जाने से पहले वो दोबारा हड़ताल नहीं करेंगे.”

एयर इंडिया के क़रीब 800 पायलट गत 27 अप्रैल से हड़ताल पर गए थे.

पायलटों के मुताबिक उन्हे मैनेजमेंट की ओर से ये वादा चाहिए कि एक निश्चित अवधि के अंदर उन्हें एयर इंडिया के साथियों के बराबर वेतन और सुविधाएं दी जाएंगी और पायलटों के ख़िलाफ़ सभी कार्रवाइयां रद्द कर दी जाएँगीं.

एयर इंडिया के प्रवक्ता कमलजीत रतन ने बीबीसी को बताया, “एयर इंडिया की मैनेजमेंट और सरकार, दोनों ही एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के पायलटों की समान तनख़्वाह के हक में हैं, लेकिन उसके लिए जब समिति बनाई गई है तो उसकी रिपोर्ट का इंतज़ार करना होगा.”

एयर इंडिया का कहना है कि उनके अलग-अलग विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाली 14 यूनियन हैं और इस तरीके से एक की बात मानना उनके लिए सहज नहीं है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पायलटों के बाद गुरूवार को एयर इंडिया के केबिन क्रू ने भी वेतन बढ़ोत्तरी की मांग की है.

हड़ताल कर रहे पायलटों की ही तरह वो भी इसके अलावा एयरलाइन में भ्रष्टाचार की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग भी कर रहे हैं.

हालांकि उन्होंने कहा है कि वे इसके लिए हड़ताल पर नहीं जाएँगे.

समिति का गठन

साल 2007 में एयर इंडिया ओर इंडियन एयरलाइन्स का विलय हुआ था. इससे पहले एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय और इंडियन एयरलाइन्स घरेलू उड़ानें संचालित करता था.

लेकिन तीन साल में भी विलय की प्रक्रिया कार्यान्वित ना हो पाने और पायलटों की यूनियन के अपनी मैनेजमेंट से आश्वस्त ना हो पाने की वजह से नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जस्टिस धर्माधिकारी समिति का गठन किया.

इस समिति को एयर इंडिया के कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों जैसे, तनख़्वाह, पद, भत्ते, सामाजिक कल्याण वगैरह के बारे में यूनियन और मैनेजमेंट से बात कर, नए कायदे बनाने हैं.

इस तीन सदस्यीय समिति में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस डीएम धर्माधिकारी, आईआईटी में पढ़ा चुके प्रोफेसर ढोलकिया और सरकारी नीति के जानकार दयाल हैं.

15 मार्च को गठित हुई इस समिति ने 26 अप्रैल से काम शुरू किया और इसे पांच महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है.

लेकिन 26 अप्रैल को ही एयर इंडिया के पायलट हड़ताल पर चले गए.

पायलटों के खिलाफ कार्रवाई

इस दौरान एयर इंडिया ने सात पायलटों और छह अन्य कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है.

हड़ताल पर जाने वाले पायलट इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) का हिस्सा हैं और एयर इंडिया मैनेजमेंट ने इस यूनियन की मान्यता भी रद्द कर दी है.

मैनेजमेंट के इस फैसले के खिलाफ जब यूनियन ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया तो उन्हें राहत नहीं मिली, बल्कि हाईकोर्ट ने उन्हें हड़ताल वापस लेने का आदेश दिया.

ऐसा ना होने पर मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने नौ पायलटों के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का नोटिस जारी कर दिया.

एयर इंडिया रोज़ाना 320 उड़ानें संचालित करता है. इनमें से आधी अंतरराष्ट्रीय और आधी घरेलू उड़ानें हैं.

एयर इंडिया के मुताबिक हड़ताल की वजह से सिर्फ घरेलू उड़ानों पर असर पड़ा है जबकि सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बिना किसी बाधा के चल रही हैं.

इस समय 165 में से करीब 125 उड़ानें बंद हैं जिससे एयर इंडिया को 25 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा रोज़ाना हो रहा है.

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