ओसामा के लिए 'नमाज़े जनाज़ा'

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भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने ओसामा बिन लादेन के लिए शुक्रवार को ग़ायबाना जनाज़े की नमाज़ का आयोजन किया.

ग़ायबाना यानी जो मौजूद न हो. इस मामले में ओसामा बिन लादेन का जनाज़ा मौजूद नहीं था.

अलगाववादी संगठन हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता गिलानी ने कहा था कि ओसामा ‘शहीद’ हुए हैं और एक ‘शहीद’ को ये सम्मान देना उनकी ज़िम्मेदारी है.

शुक्रवार को गिलानी ने एक स्थानीय इमाम के नेतृत्व में कई सौ की संख्या में इकट्ठे हुए लोगों के साथ नमाज़े जनाज़ा अदा की.

गिलानी ने कहा कि धार्मिक नेताओं में इस बात को लेकर बेहद रोष है कि ओसामा बिन लादेन के ‘शहीद’ होने के बाद उन्हें समुद्र में दफ़ना दिया गया. उन्होंने कहा शुक्रवार की नमाज़े जनाज़ा के ज़रिए उन्होंने अपनी धार्मिक ज़िम्मेदारी निभाई है.

ओसामा के लिए दुआ

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Image caption गिलानी ने आम लोगों से नमाज़ के लिए जुटने की अपील की थी.

गिलानी ने आम लोगों से अपील की थी कि शुक्रवार की नमाज़ के बाद वो ओसामा के लिए दुआ करें.

ओसामा बिन लादेन सोमवार को अमरीका की ओर से पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में किए गए एक अभियान में मारे गए थे. अमरीकी सैन्य अधिकारियों ने समुद्र में एक गुप्त स्थान पर उन्हें दफ़ना दिया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर के कई शहरों और कई मस्जिदों में ओसामा के लिए नमाज़ पढ़ी गई. इसमें बटमालू के अलावा फ़ुलवामा, सोपोर और कुपवाड़ा हैं.

नमाज़ के बाद गिलानी ने कहा कि उनकी दुआएं पाकिस्तान के साथ भी हैं क्योंकि पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है और उसे पूरी दुनिया से ख़तरे का सामना करना पड़ रहा है.

पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौत के ख़िलाफ़ धार्मिक गुटों के आह्वान पर विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन भी किए गए हैं.

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