वोट डालने के लिए तीन दिन चलना होगा

  • 7 मई 2011
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Image caption बस्तर में चुनाव के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है

नक्सली हिंसा का सामना कर रहे छत्तीसगढ़ के जंगली इलाक़े बस्तर में चुनाव आयोग ने मतदानकर्मियों और सुरक्षा बलों को मतदान केन्द्रों तक जाने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर दी है.

लेकिन कई जगह मतदाता या तो अपना वोट डालने से वंचित रहेंगे या फिर अपने मत का प्रयोग करने के लिए तीन-तीन दिनों तक मीलों की पैदल यात्रा करनी पड़ेगी.

बस्तर संसदीय उपचुनाव के दौरान लगभग 208 मतदान केन्द्रों का स्थान बदल दिया गया है. ऐसा राज्य प्रशासन की अनुशंसा और चुनाव आयोग के आदेश से हुआ है.

बस्तर संसदीय सीट के लिए मतदान रविवार, आठ मई को होना है.

मीलों का सफ़र

मतदाताओं को परेशानी मतदान केंद्रों को बदलने से ही हुई है.

मिसाल के तौर पर बस्तर संभाग के ही बीजापुर ज़िले के मारूढ़बाका के मतदान केंद्र संख्या एक और दो को 40 किलोमीटर दूर तिम्मापुर के आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला में स्थानांतरित कर दिया गया है.

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Image caption मतदान केंद्रों को हटाए जाने से राजनीतिक दल नाराज़ हैं

इसी तरह पीडिया के मतदान केंद्र को 35 किलोमीटर दूर गंगालूर स्थानांतरित कर दिया गया है.

बीजापुर के ही संड्रा और पीलूर के मतदान केन्द्रों को वहाँ से हटाकर भोपालपट्टनम के माध्यमिक विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है. पीलूर से भोपालपट्टनम की दूरी 40 किलोमीटर है जबकि संड्रा से भोपालपट्टनम 70 किलोमीटर की दूरी पर है.

इन इलाक़ों से भोपालपट्टनम आने के लिए ना सड़क है ना साधन.

पगडंडियों और पहाड़ियों से होते हुए यहाँ या तो पैदल या फिर साईकिल पर पहुंचा जा सकता है.

पैदल आने वालों को दो से तीन दिनों तक का सफ़र तय करना पड़ेगा.

कहा जा सकता है कि आने जाने में हफ़्ते भर का चक्कर हो जाएगा.

ऐसे में यहाँ के मतदाताओं में वोट डालने की कितनी इच्छा होगी इसका अनुमान लगाया जा सकता है.

वैसे भी हर चुनाव में इन इलाक़ों में बहुत कम मतदान होता है.

मतदान केंद्र बदले

सिर्फ़ बीजापुर ज़िले में 82 मतदान केन्द्रों को इधर से उधर कर दिया गया है.

ऐसा नक्सली हिंसा की आशंका की वजह से किया गया है.

इस फ़ैसले से इस इलाक़े के 42 हज़ार मतदाता प्रभावित हुए हैं.

जगदलपुर और दंतेवाड़ा ज़िलों में 70 मतदान केन्द्रों को बदला गया है जबकि नारायणपुर जिले में 20 मतदान केन्द्रों को.

नारायणपुर के अबुझमाड़ के इलाक़े में जो मतदान केंद्र बदले गए हैं वहां मतदाताओं को 40 किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र करना पड़ेगा.

इसके बारे में बस्तर संभाग के आयुक्त के श्रीनिवासुलु का कहना है कि ऐसा सुरक्षा की दृष्टिकोण से किया गया है.

वे कहते हैं, "मतदानकर्मियों, सुरक्षा बलों के जवानों और ईवीएम मशीनों की सुरक्षा के लिए ऐसा किया गया है. यह सभी मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील इलाकों में थे. ऐसी व्यवस्था की गई है कि कुछ कदम चलकर मतदान केंद्र जाएंगे तो कुछ क़दम मतदाता इन केन्द्रों पर चलकर आएंगे."

मतदान केन्द्रों को बदले जाने को लेकर सभी राजनीतिक दल नाराज़ हैं.

उनका मानना है कि ऐसा करने से बहुत बड़ी संख्या में मतदाता वोट डालने से वंचित हो जाएंगे.

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