सहारा प्रमुख के ख़िलाफ़ अवमानना की नोटिस

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Image caption सुप्रीम कोर्ट स्वयं 2-जी घोटाले की जांच कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय सहारा और सहारा मीडिया समूह के दो पत्रकारों के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है.

प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में उन लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस जारी किया है.

इन लोगों पर 2-जी घोटाले की जांच कर रहे एक अधिकारी, प्रवर्तन निदेशालय के असिस्टेंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह, को धमकाने का आरोप है.

इस घोटाले की जांच की निगरानी ख़ुद सुप्रीम कोर्ट कर रहा है.

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार सुब्रत रॉय को दो बार समन भेजा गया था लेकिन वो पूछ ताछ के लिए कभी हाज़िर नहीं हुए.

सांठ-गांठ

निदेशालय सुब्रत राय से 150 करोड़ रुपए के लेन-देन के बारे में पूछताछ करना चाहता था.

रॉय पर करोड़ों रुपए के टेलीकॉम घोटाले में कथित रुप से शामिल स्वान टेलिकॉम कंपनी से सांठ-गांठ करने का आरोप है.

प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक़ सहारा समूह के ज़रिए स्वान टेलीकॉम को हस्तांतरित किए गए 150 करोड़ रुपयों का कथित रूप से 2जी घोटाले से सीधा सम्बंध है.

आरोप है कि निदेशालय के सामने हाज़िर होने के बजाए सुब्रत रॉय ने सहारा मीडिया समूह के दो पत्रकार उपेंद्र राय और सुबोध जैन के ज़रिए निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह को धमकाया.

धमकाने की कोशिश

कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज़ों के मुताबिक़ सहारा समय के पत्रकारों ने राजेश्वर सिंह के ख़िलाफ़ ख़बरें दिखाने की भी धमकी दी थी.

दस्तावेज़ों का जायज़ा लेने के बाद कोर्ट ने कहा कि पहली नज़र में ये सही लगता है कि जांच अधिकारी को धमकाने की कोशिश की गई है.

अदालत ने सख़्त रवैया अपनाते हुए कहा कि अगर किसी ने जांच पर असर डालने की कोशिश की तो उसे 'सरकारी मेहमान' बनाया जाएगा.

अदालत ने इस मामले में सुब्रत राय और दोनों पत्रकारों को छह हफ़्ते में जवाब दाख़िल करने को कहा है.

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