पश्चिम बंगाल में 82.2 फ़ीसदी मतदान

  • 7 मई 2011
बंगाल चुनाव (फ़ाईल फो़टो) इमेज कॉपीरइट AP
Image caption मतदान के लिए सुबह से ही लोगों की लंबी क़तारें हैं.

अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच पश्चिम बंगाल के चार जिलों की 38 सीटों के लिए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया है.

राज्य में सत्ताधारी वाम मोर्चे के लिए पांचवे चरण का मतदान खासतौर पर अहमियत रखता है.

2006 के विधानसभा चुनावों में 38 में से 35 सीटें वाम मोर्चा ने जीती थी. शेष तीन में से दो कॉंग्रेस और एक पर तृणमूल कॉंग्रेस किसी सफल हो पाए थे.

2006 में वाम मोर्चा की ज़बरदस्त जीत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे डाले गए कुल मतों में से क़रीब 92 फ़ीसदी मत मिले थे.

पर वाम मोर्चा के समर्थन में महज़ तीन साल में काफ़ी गिरावट आई है.

2009 के लोक सभा चुनावों के हिसाब से कॉंग्रेस-तृणमूल गठबंधन सात सीटों पर आगे थी और वाम पंथियों का मत प्रतिशत भी घट कर लगभग 81 प्रतिशत ही रह गया था.

प्रमुख उम्मीदवार

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ सुर्यकांत मिश्रा पश्चिमी मिदनापुर ज़िले की नारायणगढ़ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

राज्य कॉंग्रेस प्रदेशाध्यक्ष मानस भुइयां इसी ज़िले की सबंग सीट से अपना भाग्य आज़मा रहें हैं.

पुरुलिया ज़िले की पुरुलिया सीट 1977 के बाद से वाम पंथी कभी नहीं हारे हैं पर इस बार तृणमूल कॉंग्रेस के ज़िलाध्यक्ष के पी सिंह देव, सीपीएम के कौशिक मजूमदार को कड़ी चुनौती दे रहें है.

पिछले विधान सभा चुनावों में ज़िले की पांच में से पांच सीटें वामपंथियों के पास थीं और कॉंग्रेस-तृणमूल यहाँ खाता तक नहीं खोल पाए थे.

वाम पंथी छात्र संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया की राज्य इकाई के युवा सचिव आभास रायचौधरी बर्द्घवान ज़िले की बाराबनी सीट से सीपीएम के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य भी इसी संगठन के ज़रिये राजनीति में आए थे.

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