बस्तर में 40 फीसदी मतदान

बस्तर
Image caption बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी कड़ी है और वोटिंग करने के लिए कम ही निकले हैं.

माओवादियों के चुनाव बहिष्कार के आह्वान और हिंसक घटनाओं के बीच छत्तीसगढ़ की बस्तर संसदीय सीट के लिए हुए उपचुनावों में क़रीब 40 प्रतिशत मतदान हुआ है.

कई इलाक़ों में मतदान कम हुआ है. मतदान के कम प्रतिशत का कारण चिलचिलाती धूप और मतदान के प्रति रुझान नहीं होना बताया जाता है.

माओवादियों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम देकर मतदान को प्रभावित करने की कोशिश की है.

बस्तर संभाग के कई स्थानों पर माओवादियों ने मतदानकर्मियों और पोलिंग एजेंटों पर हमला भी किया.

इस दौरान दंतेवाड़ा के नकुलनार इलाक़े में एक बारुदी सुरंग का विस्फोट किया. लेकिन इस विस्फोट में किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नकुलनार के खूँटेपाल के पास मतदानकर्मियों को छोड़कर बारूदी सुरंग निरोधक वाहन और कुछ अन्य वाहन लौट रहे थे.

इसी बीच धमाका हुआ.

पुलिस का कहना है कि दंतेवाड़ा के ही काटेकल्याण के पास माओवादियों ने घात लगाकर मतदानकर्मियों को ले जा रहे एक दल पर अंधाधुंध गोलियाँ चलानी शुरू कर दी.

मतदानकर्मियों के साथ जा रहे सुरक्षाबलों के जवानों ने जवाबी कार्रवाई की.

इस दौरान एक विशेष पुलिस अधिकारी के घायल होने की ख़बर है.पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ अब भी जारी है और ये घटनास्थल दंतेवाड़ा ज़िला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर है.

इसके अलावा ख़बरें आ रही हैं कि पूरे बस्तर संभाग के अंदरुनी इलाक़ों में माओवादियों ने कई सड़क मार्गों को बंद कर दिया है. कहीं पर पेड़ काट कर डाल दिए गए हैं तो कहीं सड़कों पर गड्डे खोद दिए.

कड़ी सुरक्षा और जोश कम

इस उपचुनाव के 1716 बूथों में क़रीब 80 प्रतिशत अति संवेदनशील घोषित किए गए थे. इस कारण सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी कड़ी थी.

पूरा इलाक़ा छावनी में तब्दील कर दिया गया.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद बलिराम कश्यप के निधन के कारण ये सीट ख़ाली हुई थी.

इस सीट पर आठ उम्मीदवारों के भाग्य का फ़ैसला होना है. भाजपा ने इस सीट पर बलिराम कश्यप के पुत्र दिनेश कश्यप को खड़ा किया है जबकि कांग्रेस नें बस्तर से अपने एकमात्र विधायक कवासी लकमा को अपना उम्मीदवार बनाया है.

रविवार के सुबह से ही माओवादी छापामारों सक्रिय हो गए और उन्होंने दंतेवाड़ा जिले में कमसकम दो स्थानों पर बारूदी सुरंग का ज़ोरदार विस्फोट किया. माओवादियों की कोशिश थी कि मतदान कर्मियों को उनके केन्द्रों तक जाने से रोका जाए.

तोंगपल और कोंडागांव के मर्दापाल में भी माओवादियों नें बारूदी सुरंग का विस्फोट किया और नारायणपुर में सुरक्षा बलों पर भी हमला किया गया.

हालाकि शहरी इलाकों में सुबह आठ बजे से ही मतदान केन्द्रों पर लोगों की कतारें लगनी शुरू हो गयीं. मगर शहरी मतदाता में भी जोश कम नज़र आया.

ग्रामीण इलाकों में भी मतदान काफी धीमा रहा. इसका कारण बताया जाता है कि लोगों को कई किलोमीटर तक पैदल सफ़र तय कर वोट डालने आना पड़ रहा था.

यही वजह है कि दोपहर दो बजे तक पूरे संसदीय क्षेत्र में मात्र 30 प्रतिशत ही मतदान हुआ.

मतदान का प्रतिशत कम होने के बावजूद प्रशासन ने किसी बड़ी हिंसा की घटना ना होने पर राहत की सांस ली है.

अब प्रशासन के सामने मतदानकर्मियों और इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को मतगणना केंद्र तक सुरक्षित लाने की एक बड़ी चुनौती है.

वैसे प्रशासन ने इस काम के लिए हेलीकाप्टर और अर्द्ध सैनिक बलों के टुकड़ियों को लगाया है. मगर हमेशा देखा गया है कि मतदान कराकर वापस लौटते हुए ही माओवादियों के हमले तेज़ होते हैं.

कहा जा रहा है कि सोमवार की शाम तक सभी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें जगदलपुर के सरकारी पोलिटेक्निक पहुंचा दी जाएंगी.

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