आंध्रप्रदेश में कांग्रेस की चिंता

Image caption जगनमोहन की भारी जीत से कांग्रेस हतप्रभ है

आंध्रप्रदेश कांग्रेस मामलों के प्रभारी गुलाम नबी आज़ाद राज्य में पार्टी की दिन-ब-दिन बिगड़ती हालत का एक चिंताजनक चित्र अपने साथ लेकर दिल्ली वापस लौटे हैं.

आज़ाद ने, जिन्हें तीन महीने पहले ही आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था, एक ऐसे समय दो दिन हैदराबाद में गुज़ारे जब बाग़ी नेता वाई एस जगनमोहन रेड्डी के हाथों पार्टी को कडप्पा लोकसभा चुनाव क्षेत्र में बहुत ही अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा और पार्टी के प्रत्याशी की ज़मानत ज़ब्त हो गई. इसी परिप्रेक्ष्य में पार्टी की हालत का जायज़ा लेने के लिए आज़ाद ने पार्टी के नेताओं, सांसदों और विधायकों से भेंट की और उनका विश्लेषण सुना. आज़ाद को जो कुछ सुनने और देखने को मिला उससे यह स्पष्ट था कि एक और पार्टी तेलंगाना राज्य की मांग के मुद्दे पर क्षेत्रीय आधार पर बंटी हुई है और दूसरी और मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी से नाराज़गी और निराशा बढ़ रही है हालाँकि उन्हें यह पद संभाले चार महीने भी नहीं हुए हैं. गत दो दिनों में तेलंगाना और आंध्र के नेताओं और विधायकों ने आज़ाद से अलग-अलग भेंट की और तेलंगाना राज्य के पक्ष और विरोध में अपने तर्क उनके सामने रखे. तेलंगाना के नेताओं और विधायकों ने ज़ोर देकर कहा कि अगर तेलंगाना राज्य नहीं बनाया गया तो कांग्रेस पार्टी का क्षेत्र में वही हाल होगा जो इस समय कडप्पा में हुआ है.

एक विधायक दामोदर रेड्डी ने धमकी दी कि अगर जल्द ही कोई फैसला नहीं किया गया तो तेलंगाना नेता अपनी योजना पर अमल शुरू कर देंगे. एक मंत्री डी के अरुणा ने कहा कि पार्टी के पास 9 दिसम्बर 2009 का वादा पूरा करने के सिवा कोई रास्ता नहीं है. दूसरी और आंध्र और रायलसीमा के नताओं और विधयाकों ने आजाद से भेंट करके कहा की अगर राज्य का बंटवारा किया गया तो पार्टी अगला चुनाव नहीं जीत सकेगी.

मुख्यमंत्री के खिलाफ़ बगावत

इस बीच कई मंत्रियों और विधायकों ने आज़ाद से मुख्यमंत्री की शिकायत की और कहा की वो सब को अपने साथ लेकर चलने और अच्छा नेतृत्व देने में असफल रहे हैं.

इसकी शुरुआत ख़ुद उनके अपने जिले चित्तूर के चार विधायकों ने की जिन्होंने आरोप लगाया कि वो उनके विरुद्ध बदले की भावना रखते हैं और उनके चुनाव क्षेत्रों में कोई विकास का काम नहीं होने दे रहे हैं.

कई मंत्रियों ने कहा कि मुख्यमंत्री एक ऐसे समय नेतृत्व में असफल रहे हैं जब की जगनमोहन रेड्डी की वजह से पार्टी को एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. उन का यह भी कहना था की किरण भविष्य में जगन का मुकाबला नहीं कर सकते और न ही वोह अगले चुनाव में पार्टी को कामयाबी दिला सकते हैं. कुछ नेताओं ने मांग की कि जो विधायक और सांसद जगन का साथ दे रहे हैं उनके खिलाफ़ पार्टी को तुरंत कोई करवाई करनी पड़ेगी.

जिस समय आज़ाद हैदराबाद में थे, जगन गुंटूर में किसानों की समस्या पर तीन दिन की दीक्षा पर थे जहाँ पंद्रह से ज्यादा कांग्रेसी विधायक और दो सांसद उन के समर्थम इन मौजूद थे.

कुल मिलकर आज़ाद इस रिपोर्ट के साथ वापस गए हैं की जल्द ही आलाकमान को आंध्र प्रदेश में हालत को सँभालने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे.

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