तो इसलिए नहीं डाला था वोट!

  • 10 मई 2011
बंगाल चुनाव में मुस्लिम महिला मतदाता इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption कुछ मुस्लिम महिलाओं ने जीवन में पहली बार वोट डाले

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पांचवें दौर में अल्पसंख्यक तबक़े की लगभग साढ़े छह सौ महिलाओं ने अपने जीवन में पहली बार वोट डाला.

इसकी वजह यह थी कि अब तक उनके पास मतदाता पहचान पत्र नहीं था और वह किसी चुनाव में वोट नहीं डाल पाती थीं.

सवाल यह है कि क्यों नहीं था उनके पास पहचान पत्र.यह कहानी काफ़ी दिलचस्प है.

दरअसल, वह इस पहचान पत्र के लिए किसी पुरुष फ़ोटोग्राफ़र से अपनी तस्वीर नहीं खिंचाना चाहती थीं.

बंगाल के सबसे पिछड़े ज़िलों में शुमार पुरुलिया के रघुनाथपुर विधानसभा इलाक़े में चुनाव विभाग के पास कोई महिला फ़ोटोग्राफ़र नहीं थी.

इसलिए न तो उनकी फ़ोटो खींची गई और न ही पहचान पत्र बन सका. इसके नतीजे में वह किसी चुनाव में वोट नहीं डाल सकी थीं.

पहचान पत्र

लेकिन इस बार के चुनाव में सकीना समेत साढ़े छह सौ महिलाओं ने रघुनाथपुर विधानसभा के दो मतदान केंद्रों पर पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

सकीना का कहना था, ''हमारे मज़हब में ग़ैर-मर्दों के सामने चेहरा दिखाना उचित नहीं माना जाता. इसलिए हम अपनी फ़ोटो नहीं खिंचा रहे थे. लेकिन जीवन में पहली बार वोट देकर हमें बेहद खुशी हो रही है.''

पुरुलिया के ज़िलाधिकारी और ज़िला चुनाव अधिकारी ए.सिंह कहते हैं, ''फ़ोटो पहचान पत्र तैयार करने के लिए फ़ोटो खींचने वाले फ़ोटोग्राफर पुरुष थे और यह महिलाएं पुरुषों के सामने नक़ाब उतार कर फ़ोटो खिंचवाने के लिए तैयार नहीं थीं.इन महिलाओं की भावना का आदर करते हुए प्रशासन ने उनके लिए ख़ास तौर पर महिला फ़ोटोग्राफर का इंतज़ाम किया. उसके बाद उनके फ़ोटो खींचे गए और पहचान पत्र तैयार हो सका.''

यही नहीं, उन महिलाओं ने जिन मतदान केंद्रों पर वोट डाले वहां सभी चुनाव कर्मचारी और भीतर तैनात सुरक्षाकर्मी भी महिला ही थीं.

अल्पसंख्यक तबक़े की उन महिलाओं का कहना था कि अगर मतदान केंद्रों में कोई भी पुरुष कर्मचारी हो तो वह वोट डालने नहीं जाएंगी.प्रशासन ने आख़िर उनकी यह मांग भी मान ली.

सिंह कहते हैं कि यह पहला मौक़ा है जब उन महिलाओँ ने वोट डाले हैं.

रघुनाथपुर के उन दोनों मतदान केंद्रों में इन 641 महिलाओं समेत कुल 1460 वोटर थे.

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